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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : सीट बंटवारे पर वाम मोर्चा और आईएसएफ में खींचतान

आईएसएफ ने स्पष्ट कर दिया है कि वह 294 सदस्यीय विधानसभा में 40 से कम सीटों पर समझौता नहीं करेगा। दूसरी ओर वाम मोर्चा की ओर से अधिकतम 32 सीटों का प्रस्ताव रखा गया है।

13 Feb 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : सीट बंटवारे पर वाम मोर्चा और आईएसएफ में खींचतान

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में इस वर्ष प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा और ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर बातचीत अटक गई है।

आईएसएफ ने स्पष्ट कर दिया है कि वह 294 सदस्यीय विधानसभा में 40 से कम सीटों पर समझौता नहीं करेगा। दूसरी ओर वाम मोर्चा की ओर से अधिकतम 32 सीटों का प्रस्ताव रखा गया है।

गुरुवार को इस मुद्दे पर कोलकाता के अलीमुद्दीन स्ट्रीट स्थित पार्टी मुख्यालय में लंबी बैठक हुई। बैठक में वाम मोर्चा के अध्यक्ष बिमान बोस और विधानसभा में आईएसएफ के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी सहित अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।

सूत्रों के अनुसार, आईएसएफ नेतृत्व ने कहा कि वह 44 अल्पसंख्यक बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी उतारना चाहता है और किसी भी स्थिति में 40 से कम सीटें स्वीकार नहीं करेगा।

वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का कहना है कि वाम मोर्चा के अन्य सहयोगी दलों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए आईएसएफ को अधिकतम 32 सीटें ही दी जा सकती हैं। इनमें भी सभी सीटें आईएसएफ की पहली पसंद की हों, यह आवश्यक नहीं है।

आईएसएफ का तर्क है कि इस बार कांग्रेस पहले ही सीट समझौते से अलग होने का निर्णय ले चुकी है, ऐसे में वाम मोर्चा के लिए 40 सीटें देना कठिन नहीं होना चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि कांग्रेस साथ होती तो उसकी सीटों की मांग कहीं अधिक रहती।

इसके जवाब में वाम मोर्चा का कहना है कि कांग्रेस के अलग होने के कारण अन्य सहयोगी दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक भी इस बार अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि, वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चा, कांग्रेस और आईएसएफ ने ‘संयुक्त मोर्चा’ के तहत मिलकर चुनाव लड़ा था। हालांकि, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में आईएसएफ ने इस गठबंधन से अलग राह अपनाई थी, जबकि कांग्रेस और वाम दलों के बीच समझौता जारी रहा।

अब विधानसभा चुनाव से पहले सीटों का यह समीकरण तय करेगा कि वाम मोर्चा और आईएसएफ साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे या अलग-अलग मैदान में उतरेंगे।

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