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पश्चिम बंगालः चार सप्ताह में यूसीसी बिल पर गठित समिति देगी रिपोर्ट, अगस्त में विधानसभा में होगा पेश

पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पश्चिम बंगाल समान नागरिक संहिता, 2026 के मसौदा विधेयक को मंजूरी दी गई।

03 Jul 2026

पश्चिम बंगालः चार सप्ताह में यूसीसी बिल पर गठित समिति देगी रिपोर्ट, अगस्त में विधानसभा में होगा पेश

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पश्चिम बंगाल समान नागरिक संहिता, 2026 के मसौदा विधेयक को मंजूरी दी गई। अब इस मसौदे को परीक्षण और सुझावों के लिए उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति के पास भेजा जाएगा।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, समिति अगले चार सप्ताह के भीतर मसौदा विधेयक का परीक्षण कर अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगी। समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार अंतिम विधेयक तैयार करेगी और इसे अगस्त में होने वाले विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 29 जून को विधानसभा में इस प्रस्तावित कानून को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि राज्य के आदिवासी, मूल निवासी, कुर्मी तथा अन्य मान्यता प्राप्त प्राचीन जनजातीय समुदायों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह निर्णय उत्तराखंड और गुजरात में अपनाए गए मॉडल के अनुरूप लिया गया है, जहां जनजातीय समुदायों को विशेष छूट प्रदान की गई है।

प्रस्तावित समान नागरिक संहिता का उद्देश्य राज्य में धर्म आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर विवाह, तलाक, भरण-पोषण, गोद लेने, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े नागरिक मामलों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। सरकार का कहना है कि इससे सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित होगी तथा विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के कारण उत्पन्न होने वाली असमानताओं को समाप्त किया जा सकेगा।

यदि यह विधेयक विधानसभा से पारित होकर कानून का रूप लेता है, तो पश्चिम बंगाल समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बन जाएगा। इससे पहले गुजरात, उत्तराखंड और असम में समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है।

गुरुवार रात तक हुई मंत्रिमंडल की बैठक में समान नागरिक संहिता के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को सरकारी खर्चों में सख्त नियंत्रण रखने और अनावश्यक व्यय पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं में अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें तुरंत बाहर किया जाए, ताकि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके और योजनाओं के संचालन में वित्तीय बोझ कम किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने सभी सरकारी विभागों को राजस्व रिसाव रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। विशेष रूप से पत्थर खदानों और बालू खनन जैसे क्षेत्रों में कर संग्रह से जुड़े राजस्व की निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया। सरकार का मानना है कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान इन क्षेत्रों में व्यापक भ्रष्टाचार के कारण राजस्व का बड़ा नुकसान हुआ था।

बैठक में मंत्रिमंडल ने सीमा सुरक्षा से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। इसके तहत विभिन्न जिलों में सरकारी स्वामित्व वाली भूमि को सीमा सुरक्षा बल और सशस्त्र सीमा बल को स्थायी हस्तांतरण की स्वीकृति दी गई। इस भूमि का उपयोग सीमा चौकियों के निर्माण, सीमा पर बाड़ लगाने तथा सीमा क्षेत्रों में सड़क निर्माण सहित अन्य सुरक्षा संबंधी परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।

इसके अलावा राज्य में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 9 जिलों में 9 नए त्वरित न्यायालय स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इन न्यायालयों के संचालन के लिए 35 नए पदों के सृजन को भी मंत्रिमंडल ने स्वीकृति प्रदान की।

राज्य सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करना है, जबकि अनुसूचित जनजातियों और पारंपरिक समुदायों के संवैधानिक अधिकारों तथा उनकी परंपराओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी। अगस्त में विधानसभा में विधेयक पेश होने के बाद इस पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
 

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