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भाजपा ने तैयार किया आक्रामक प्रचार का रोडमैप
कोलकाता। विधानसभा चुनाव का सियासी पारा अब अपने चरम पर पहुंचने वाला है। पहले चरण के चुनावी शोर के बीच भाजपा ने दूसरे चरण के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। भाजपा के रणनीतिकारों ने तय किया है कि 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा के फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ के दौरों और रैलियों में भारी इजाफा किया जाएगा।
पार्टी सूत्रों की मानें तो पहले चरण की तुलना में दूसरे चरण में योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी कहीं अधिक प्रभावी और व्यापक होने वाली है। भाजपा नेतृत्व उन्हें उन सीटों पर मुख्य रूप से उतारने की तैयारी में है, जहां मुकाबला बेहद कड़ा और प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को भाजपा के मिशन 140+ से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरे चरण में जिन 140 से अधिक सीटों पर मतदान होना है, उनमें से कई सीटें भौगोलिक और जनसांख्यिकीय दृष्टि से भाजपा के लिए बेहद संवेदनशील हैं। पार्टी की योजना के अनुसार, योगी आदित्यनाथ केवल जनसभाएं ही नहीं करेंगे, बल्कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में उनके रोड शो के जरिए शक्ति प्रदर्शन भी किया जाएगा। विशेष रूप से सीमावर्ती जिलों और उन निर्वाचन क्षेत्रों में जहां ध्रुवीकरण की गुंजाइश अधिक है, वहां योगी आदित्यनाथ के कड़े तेवर और जीरो टॉलरेंस वाली छवि को भुनाने की कोशिश होगी।
पार्टी को उम्मीद है कि योगी के भाषणों से न केवल उनका कोर वोट बैंक एकजुट होगा, बल्कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर उनकी स्पष्टवादिता नए मतदाताओं को भी प्रभावित करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा योगी आदित्यनाथ को एक ऐसे चेहरे के रूप में पेश कर रही है जो तृणमूल के खिलाफ हिंदुत्व और सुशासन के संगम का प्रतिनिधित्व करता है। उनके जरिए भाजपा बंगाल के चुनावी नैरेटिव को सीधे तौर पर घुसपैठ, भ्रष्टाचार और सुरक्षा के मुद्दों पर केंद्रित करना चाहती है। चूंकि दूसरे चरण में मतदान वाली सीटों की संख्या बड़ी है, इसलिए भाजपा आलाकमान ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची में योगी के कार्यक्रम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि चुनावी समर के इस अंतिम दौर में योगी की हुंकार माहौल को पूरी तरह भाजपा के पक्ष में मोडऩे की ताकत रखती है। अब सबकी निगाहें 23 अप्रैल के पहले चरण के बाद 29 अप्रैल की तैयारियों पर टिकी हैं, जहां योगी आदित्यनाथ की बढ़ी हुई सक्रियता बंगाल की सत्ता का भविष्य तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।