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औद्यौगिक प्रसार एवं नये उद्योगों की संभावना के प्रति भी व्यवसायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने परिवर्तन का स्वागत किया है।
बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन से आम लोग साथ ही उद्योग-व्यवसाय भी खुश हैं। व्यवसायिक संगठनों एवं चेप्टरों के शीर्ष लोगों ने विज्ञप्ति जारी कर आशा की है कि बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन से राज्य में निवेश बढ़ेगा। औद्यौगिक प्रसार एवं नये उद्योगों की संभावना के प्रति भी व्यवसायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने परिवर्तन का स्वागत किया है। मर्चेंट्स चेम्बर ऑफ कामर्स एवं इंडस्ट्री को यह उम्मीद है कि इस राज्य में उद्योगों के लिए एक पारदर्शी और निवेश के अनुकूल नीति अपनाएगी। चेम्बर ने बिजली के शुल्कों में कमी की संभावना भी जताई है। चेम्बर ने एक पारदर्शी भूमि अधिग्रहण नीति अपनाई। चेम्बर की ओर से एस राय ने विज्ञप्ति जारी कर सरकार के साथ मिलकर चेम्बर विकास एवं राज्य की प्रगति हेतु मिलकर काम करेगी।
भारत चेम्बर आफ कामर्स के अध्यक्षा नरेश पचीसिया ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर बंगाल के विकास पर ध्यान केन्द्रित करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य में भारी निवेश आएगा। केन्द्रीय परियोजनाओं के फंड के साथ -साथ आई एम एफ और विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मिलने वाली वित्तीय सहायता राज्य की आर्थिक स्थिति को सु²ढ़ करेगी और राजस्व में वृद्धि होगी।
आर पी संजीव गोयनका के चेयरमैन संजीव गोयनका ने नई सरकार का स्वागत करते हुए कहा कि उद्योग जगत के आत्मविश्वास को भी बहाल करेगी। गोयनका ने कहा बंगाल के विकास विशेषकर कोलकाता के विकास के प्रति मेरा व्यक्तिगत लगाव है।
पैटन इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक संजय बुधिया ने कहा कि उनके उद्योग की पहचान इसी राज्य से जुड़ी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उद्योग और प्रशासन मिलकर राज्य में रोजगार सृजन और राजस्व वृद्धि के लिए परस्पर सहयोग करेंगे।
अंबुजा - नेवटिया समूह के सुप्रसिद्ध उद्योगपति हर्ष नेवटिया ने जनादेश को विकास का रास्ता प्रशस्त करने वाला बताया और कहा कि स्थिर सरकार के निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और केन्द्र राज्य में एक विचार की सरकार से आधारभूत ढांचे को विकसित करने में मदद मिलती है।
चेम्बर ऑफ टेक्सटाइल्स ट्रेड एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष महेंद्र जैन ने हार्दिक बधाई देते हुए जनादेश को जनता की आशा-आकांक्षा को पूरा करने का आग्रह किया। चेम्बर के अध्यक्ष महेन्द्र जैन ने कहा कि टेक्सटाइल एंड ट्रेड सेक्टर के सशक्तिकरण हेतु ठोस एवं दूरदर्शी नीतियां अपनाएगी। व्यापार को सरल एवं प्रोत्साहनकारी वातावरण तैयार किया जाएगा जिससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नये अवसर सृजन होंगे और राज्य की आर्थिक प्रगति को नई दिशा मिलेगी। महेन्द्र जैन ने भरोसा प्रकट किया।
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष के के सेकसरिया ने कहा कि लोकतंत्र के महापर्व में प. बंगाल की जनता द्वारा दिए गए विशाल जनादेश का हम सम्मान करते हैं। साथ ही नई सरकार के साथ कंधे से कंधे मिलाकर राज्य के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, निवेश प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विस्तार में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प वक्त करती है।
निदेशक, ओशन इंफ्रा प्रॉपर्टीज़ प्राइवेट लिमिटेड, कुणाल पटोदिया ने बंगाल में नई सरकार से मेरी सबसे बड़ी अपेक्षा यह है कि राज्य में नए उद्योगों की स्थापना पर विशेष ध्यान दिया जाए, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर पैदा हों। इसके साथ ही, व्यापार और समाज के हित में पार्टी क्लब और सिंडिकेट की संस्कृति को पूरी तरह से जड़ से खत्म करना बेहद जरूरी है। इससे एक सुरक्षित, पारदर्शी और सकारात्मक माहौल बनेगा, जो राज्य के आर्थिक और समग्र विकास को नई गति देगा।
कैट के नेशनल एग्जीक्यूटिव चेयरमैन सुभाष चंद्र अग्रवाला ने कहा कि देश की सबसे बड़ी व्यापारी संस्था कैट लंबे समय से बंगाल में ठोस आर्थिक और औद्योगिक सुधारों की आवश्यकता महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रोत्साहन की कमी और स्पष्ट औद्योगिक नीतियों के अभाव के कारण बड़े औद्योगिक घराने लगातार राज्य से बाहर जा रहे हैं। उद्योग जगत में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जिससे निवेश प्रभावित हो रहा है। अग्रवाला ने विशेष रूप से बिजली की बढ़ती लागत पर चिंता जताते हुए कहा कि उद्योगों की रीढ़ मानी जाने वाली बिजली की कीमतों को नियंत्रण में रखने में सरकार विफल रही है। इसके चलते उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ी है और प्रतिस्पर्धात्मकता घटी है।
ग्लास्टर केबल्स लि. के निदेशक विनय राठी ने बंगाल में हुए सत्ता परिवर्तन पर कहा कि नई सरकार से उम्मीद सिर्फ बदलाव की नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की है। कानून-व्यवस्था मजबूत हो, ताकि हर नागरिक सुरक्षित महसूस करे। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हों। उद्योग और निवेश को बढ़ावा मिले, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत बने। सड़क, बिजली, पानी और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाएं बेहतर हो। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं आम जनता तक गुणवत्तापूर्ण तरीके से पहुंचे। भ्रष्टाचार पर सख्त नियंत्रण हो और पारदर्शिता बनी रहे।
उद्योग और व्यापार को नई सरकार से बंगाल के चौमुखी विकास की आशा
अमित अग्रवाल, अध्यक्ष इंडियन प्लास्टिक फेडरेशन:भारत की औद्योगिक यात्रा में पश्चिम बंगाल का सदैव एक विशेष स्थान रहा है। यह राज्य कभी उद्यम, व्यापार, विनिर्माण, ज्ञान और वाणिज्य के प्रमुख केंद्रों में से एक था तथा भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षा की भावना को आगे बढ़ाता था। लेकिन पिछले कई दशकों में उद्योग राज्य से बाहर चले गए, कॉर्पोरेट मुख्यालय स्थानांतरित हुए, कारखानों की गति धीमी पड़ी, और अनगिनत कुशल नागरिकों को अवसरों की तलाश में राज्य से बाहर जाना पड़ा। उद्योग जगत के लिए यह क्षण केवल राजनीतिक नहीं है। यह ऐतिहासिक है। इंडियन प्लास्टिक्स फेडरेशन का मानना है कि नई सरकार के पास पश्चिम बंगाल को भारत के सबसे शक्तिशाली औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों में से एक बनाने का निर्णायक अवसर है। लंबे समय से प्रतीक्षित गहरे समुद्री बंदरगाह को अब चर्चा से आगे बढ़ाकर क्रियान्वयन तक ले जाना आवश्यक है। सही आधारभूत संरचना के साथ, पश्चिम बंगाल लॉजिस्टिक्स लागत को उल्लेखनीय रूप से कम कर सकता है।
मनीष गौरिसारिया, प्रबंध निदेशक, लायन इंडिया: हमारी प्रमुख अपेक्षा है कि सरकार सुशासन स्थापित करे और एक भयमुक्त, पारदर्शी वातावरण बनाए जहाँ हर नागरिक शांति और समृद्धि के साथ जीवन जी सके। बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देते हुए सड़कों, रेलवे और जलमार्गों का तेज़ी से आधुनिकीकरण किया जाए ताकि व्यापार और आवागमन सुगम हो। राज्य में औद्योगीकरण की संस्कृति को बढ़ावा देकर नए उद्योगों की स्थापना के लिए निवेश-अनुकूल नीतियां बनाई जाएं। एमएसएमई क्षेत्र को तकनीक, वित्त और बाज़ार से जोड़कर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जाए। साथ ही, युवा प्रतिभाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हों और स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहन मिले जिससे आत्मनिर्भर बंगाल का सपना साकार हो।
अभिषेक पोद्दार निदेशक, गंगेज जूट: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की संभावित जीत एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव का संकेत होगी, जिसके शासन, उद्योग भावना और आर्थिक दिशा पर व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं। राजनीतिक दृष्टिकोण से, ऐसा परिवर्तन राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय ला सकता है। इससे तेज़ निर्णय-प्रक्रिया, नीतियों के सुचारू क्रियान्वयन और बड़े बुनियादी ढांचा एवं औद्योगिक परियोजनाओं में बेहतर तालमेल संभव हो सकता है। उद्योग और व्यवसाय के लिए, निवेशक और कारोबारी आमतौर पर नीतिगत स्थिरता, पारदर्शिता और व्यापार करने में सुगमता की अपेक्षाओं पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार उद्योग और निर्यात को इन तरीकों से प्रोत्साहित कर सकती है: 1. भूमि अधिग्रहण ढांचे में सुधार, 2. लॉजिस्टिक्स और पोर्ट-आधारित विकास को सुदृढ़ करना, 3. औद्योगिक कॉरिडोर और निर्यात अवसंरचना को बढ़ावा देना, 4. नए श्रम संहिताओं का प्रभावी क्रियान्वयन।
विजय जैन, प्रबंध निदेशक जे के स्पाइसेज एंड फूड प्रोडक्ट्स: नई सरकार से मेरी अपेक्षा है कि बुनियादी ढांचे और उद्योगों पर फोकस करके रोजगार बढ़ाया जाए, कानून-व्यवस्था मजबूत हो, व्यवसाय के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू हो, अनावश्यक बैरिकेडिंग कम हो, सड़कों व फुटपाथों से अतिक्रमण हटाया जाए, रिहायशी इलाकों में पार्टी ऑफिस न हों, और हमारा 'सोनार बांग्लाÓ, 'सिटी ऑफ जॉयÓ, भारत का नंबर 1 विकसित राज्य बने।
डा. पारस कोचर, एडवोकेट : उम्मीद पर दुनिया कायम है। बंगाल की जनता लगभग 50 साल से बंगाल के विकास से विमुख थी। पहले सी पी एम और बाद में त्रिमूल कांग्रेस की नीतियाँ विकास से कोसों दूर थी। अब उम्मीद है कि बड़े उद्योगों में निवेश होगा। छोटे उद्योग भी तेज़ी से लगेंगे। उद्योग के साथ साथ व्यापार भी बढ़ेगा। सेवा के क्षेत्र से जुड़े उद्धमिओं को भी राहत मिलेगी। उद्योगपति और व्यापारी बंगाल छोड़ कर जा रहे थे, उस पर रोक लगेगी। बंगाल की अर्थ व्यवस्था में आशातीत सुधार होगा। जीएसटी की प्राप्ति में वृद्धि होगी। आयकर में वृद्धि के कारण राज्य की भागीदारी बढ़ेगी जिससे राजस्व में वृद्धि होगी। हालाँकि उत्पादन में बंगाल टॉप 3-4 राज्यों में नहीं है, लेकिन सेवा , एमएसएमई वित्तीय लेनदेन , यातायात आदि में स्थिति खऱाब नहीं है। परम्परागत उद्योग चाय और जूट पर नई सरकार को विशेष ध्यान दे कर इनकी समस्याओं का तुरंत समाधान करना चाहिए। लेबर समस्या यहाँ गंभीर रहती है। उनमें अनुशासन लाना चाहिये। सरकार के बदलाव मात्र से ही विकास नहीं होता है। बीजेपी के गुजरात में ही 2015 में भारत में महाराष्ट्र के बाद था जो 2025 में चौथे नम्बर पर है । कुछ नीतियों में बदलाव आवश्यक है। लैंड सीलिंग एक्ट हटना चाहिये।
आनंद कुल्थिया, कुल्थिया ज्वेलर्स: बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को लगभग एक-तिहाई सीटों का समर्थन मिलना एक बड़ा जनादेश है। जिस प्रकार पार्टी ने गुजरात, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में विकास का मॉडल प्रस्तुत किया है, वैसा ही विकास अब बंगाल में भी देखने की अपेक्षा है। राज्य में उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के अवसरों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। राजनीति से ऊपर उठकर बंगाल को एक विकसित राज्य के रूप में पहचान मिलनी चाहिए, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए भी जाना जाए। डबल इंजन सरकार से यही उम्मीद है कि ये विकास की दिशा में ठोस कदम उठाएगी और जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी।
के. डी. अग्रवाल, उद्योगपति: भाजपा की नई सरकार के नेतृत्व में सनातनी मूल्यों के सम्मान और हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार मिलने की पूर्ण उम्मीदे है। औद्योगिक पुनर्जागरण के क्षेत्र, बंगाल जो कभी भारत का औद्योगिक केंद्र हुआ करता था, पिछले कुछ दशकों में निवेश के मामले में बुरी तरह पिछड़ गया, अब केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होने से विकास की गति बुलेट ट्रेन जैसी होने की राज्य की जनता आशाएं कर रही है। इससे निवेशकों का भरोसा लौटेगा, बंद कारखानों के पहिए फिर घूमेंगे और सिंगूर से सिलीगुड़ी तक नए औद्योगिक गलियारों का निर्माण होने की भी हमे संभावना दिखती है। यह बदलाव बंगाल के मेधावी युवाओं के लिए राज्य में रोजगार के द्वार खोलेगा, जिससे पलायन की मजबूरी समाप्त होगी।
सिंडिकेट राज, कट-मनी और भर्ती घोटालों से त्रस्त जनता को अब एक पारदर्शी शासन की आशा है। भाजपा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती और प्राथमिकता एक भयमुक्त वातावरण बनाना है जिससे आम नागरिक सुरक्षित महसूस कर सके।