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विपक्षी दलों के नेताओं ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पत्र लिखा है। विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रवर्तन निदेशालय से अपील की है कि वह शेल कंपनियों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग सहित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अडानी समूह के खिलाफ जांच शुरू करे।
अडानी मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है। इस बीच कई विपक्षी दलों के नेताओं ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पत्र लिखा है। विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रवर्तन निदेशालय से अपील की है कि वह शेल कंपनियों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग सहित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अडानी समूह के खिलाफ जांच शुरू करे। इससे पहले विपक्षी दलों ने संसद से ईडी दफ्तर तक विरोध मार्च निकाला। हालांकि पुलिस ने सभी को बीच में ही रोक दिया। विजय चौक पर पुलिस द्वारा दुरुस्त बैरिकेडिंग की गयी थी।
ईडी के निदेशक एस के मिश्रा को ईमेल किए गए एक पत्र में पार्टियों ने जांच एजेंसी से कहा कि वह अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर काम नहीं कर सकती है। बता दें कि इस पत्र पर कांग्रेस, CPI, CPI-M, जदयू, एसएस (यूबीटी), राजद, DMK, JMM, AAP, आईयूएमएल, VCK, केरल कांग्रेस और अन्य नेताओं ने हस्ताक्षर भी किए हैं।
ईडी को लिखे पत्र में विपक्षी नेताओं ने कहा कि हम इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि कैसे हाल के दिनों में ईडी ने भी कथित राजनीतिक पक्षपात के मामलों को उत्साहपूर्वक आगे बढ़ाया है, जिसमें सेबी और सीबीआई के साथ समवर्ती अधिकार क्षेत्र साझा करना भी शामिल है।
पत्र में आगे लिखा है कि हम इस विषय पर नियुक्त सुप्रीम कोर्ट आयोग के सीमित दायरे से भी अवगत हैं। हम ईडी को यह याद दिलाना चाहते हैं कि वह इन या अन्य आधारों पर अपने अधिकार क्षेत्र को छोड़ नहीं सकता है। उन्होंने ईडी निदेशक से कहा कि विपक्ष के सदस्य आपसे उपर्युक्त आरोपों पर तत्काल कार्रवाई की मांग करते हैं।
पत्र में आगे दावा किया गया है कि पिछले तीन महीनों में सार्वजनिक क्षेत्र में अडानी समूह के खिलाफ कई महत्वपूर्ण साक्ष्य उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन फिर भी प्रवर्तन निदेशालय जो इस तरह के मामलों को दृढ़ता और निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ाने का दावा करता है। उनकी ओर से अभी तक इन गंभीर आरोपों की प्रारंभिक जांच भी शुरू नहीं की गई है।
उन्होंने पत्र में कहा कि इसके चलते हम इस आधिकारिक शिकायत को दर्ज करने के लिए विवश हैं, ताकि ईडी को एक ऐसे रिश्ते की जांच करने के लिए मजबूर होना पड़े, जिसका न केवल हमारी अर्थव्यवस्था बल्कि सबसे महत्वपूर्ण हमारे लोकतंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।