कम उत्पादन और अन्य राज्यों से अनियमित आपूर्ति के कारण बढ़ रही है कीमत
कोलकाता। बंगाल में विगत दिनों तापमान ने जमकर कहर बरपाया था। हालात ये थे कि अप्रैल के महिने में ही जून में पढऩे वाली झूलसा देने वाली गर्मी की मार लोगों को परेशान कर रही थी स्थिति ये थी खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गर्मी के हालातों को भापते हुए स्कूलों में छू_ी की घोषणा कर दी थी। फिलहाल कोलकाता सहित राज्यभर में हो रही बारिश के कारण लोगों को गर्मी की मार से राहत तो मिल गयी लेकिन सब्जियों के कीमतों में हुई बढ़ोत्तरी से लोग परेशान हैं।
विगत दिनों में सब्जियों के दाम भी ठीक उसी तरह बढ़े हैं जैसे अप्रैल-मई माह में पारा चढ़ रहा था। सब्जियों के कीमत में हुई बढ़ोत्तरी के पीछे भी गर्मी ही विलन बनकर उभरी हैं। कोलकाता में सब्जियों की कीमतों में 30-35 फीसदी का उछाल आया है। एक सप्ताह पहले जो हरी मिर्च 150 रुपये प्रति किलो थी वह अब 300-350 रुपये प्रति किलो की दर पर है. वहीं, टमाटर 130-150 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।
बंगाल में सब्जियों के उत्पादन में कमी और अन्य राज्यों से अनियमित आपूर्ति के कारण कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। साल के इस समय में बंगाल को हरी मिर्च, अदरक और टमाटर समेत कई सब्जियों के लिए दूसरे राज्यों से आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है। अत्यधिक गर्मी के लंबे दौर के कारण घरेलू सब्जियों के उत्पादन में गिरावट आई।
बंगाल सर्वाधिक हरी मिर्च उत्पादक राज्यों में से एक है। कृषि विभाग के रिकॉर्ड कहते हैं कि राज्य में सालाना 2,14,690 टन हरी मिर्च का उत्पादन होता है, जबकि मांग 1,45,000 टन की है। उपज का बड़ा हिस्सा मौसमी है और सर्दियों तक ही सीमित है, जब दक्षिण 24-परगना के काकद्वीप, भांगर और कैनिंग और मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में अधिशेष फसल होती है। पश्चिम बंगाल वेंडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल दे ने कहा कि इस बार हमारी घरेलू उपज अत्यधिक गर्मी के लंबे दौर से प्रभावित हुई है, जिसके कारण पौधे मुरझा गए हैं। वर्तमान में बाजारों में उपलब्ध सब्जियों के लगभग 80 प्रतिशत बिहार के कटिहार से आपूर्ति से पूरी की जा रही है। टमाटर के साथ भी ऐसा ही है. बंगाल में लगभग 9.5 लाख टन की मांग के मुकाबले 12 लाख टन से अधिक टमाटर का उत्पादन होता है। हरी मिर्च की तरह ही टमाटर का उत्पादन काफी हद तक मौसमी है, जो सर्दियों तक ही सीमित है, जब राज्य में भरपूर फसल होती है।
राज्य के कृषि-विपणन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि टमाटर को 28 दिनों से अधिक कोल्ड स्टोरेज में संग्रहीत नहीं किया जा सकता है। पिछले कुछ महीनों में राज्य पूरी तरह से कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश से आपूर्ति पर निर्भर हैं और जब आपूर्ति लडख़ड़ा गई हैं तो कीमतें भी बढ़ गईं हैं।
अदरक काफी कम मात्रा में बंगाल में उपज होती हैं ऐसे में कमी की भरपाई के लिए असम, मणिपुर, मेघालय और कर्नाटक पर बंगाल निर्भर है। बंगाल में अदरक का उत्पादन कलिम्पोंग, दार्जिलिंग और दक्षिण बंगाल के कुछ हिस्सों में होता है। अधिकारी ने कहा कि इस वर्ष अदरक की वार्षिक मांग-आपूर्ति घाटा 1 लाख टन से अधिक है। बंगाल अपने उपभोग के लिए पर्याप्त लौकी और बैंगन का उत्पादन करता है, लेकिन गर्मियों के दौरान अत्यधिक गर्मी ने इन दोनों सब्जियों के उत्पादन को प्रभावित किया जिसके परिणामस्वरूप उनकी कीमतों में वृद्धि हुई।