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रेकरिंग डिपॉजिट के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी
कोलकाता। बड़ाबाजार के छोटे व्यापारी रोजाना पाई-पाई बैंक में जमा कर रहे थे ताकि बुरे वक्त में ये पैसा उनके काम आ सके। कोई दुर्गापूजा के वक्त स्टॉक खरीदने के लिए तो कोई बच्चे के लिए इलाज के लिए। किसी को दुकान खरीदना था तो किसी की बच्चों को शादी करनी थी, लेकिन जब वक्त पड़ा तो उनके हाथ खाली थे। बैंक ने भी उनका पैसा उन्हें देने से इनकार कर दिया। घटना वृहत्तर बड़ाबाजार के बड़ाबाजार थानांतर्गत मछुआ स्थित कैनरा बैंक की है। जहां के सैकड़ों दुकानदार, हॉकर, मजदूर रेकरिंग डिपॉजिट के नाम पर बैंक के ही एजेंट को रोजाना रुपया दिया करते थे। कोई 20 रुपया तो कोई 3 से 5 हजार रुपया प्रतिदिन रेकरिंग डिपॉजिट के खाते में जमा करता था। विगत कुछ दिनों से जब बैंक के ग्राहक पैसा पाने के लिए बैंक पहुंचे तो बैंक मैनेजर ने पहले उन्हें टाल-मटोल कर बाद में आने को कहा लेकिन ढलते दिन के साथ पैसा मांगने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ती गयी।
एक ग्राहक से दूसरे ग्राहक में जब यह बात फैली तो बाकी के ग्राहक भी पैसे मांगने बैंक में पहुंच गये। सैकड़ों की संख्या में जब ग्राहक बैंक में पैसा मांगने पहुंचे तो उन्हें पता चला कि उनका खाता खाली है। जिस एजेंट को वे पैसा दिया करते थे उस एजेंट ने उनका सारा पैसा गबन कर लिया है। बैंक के ही ग्राहक प्रिया रेकी ने बताया कि वे प्रतिदिन 2 से 3 हजार रुपए बैंक खाते में जमा करती थी। साथ ही उनके स्वर्गीय पिता का भी करीब 9 लाख रेकरिंग डिपॉजिट में पड़ा था। हिसाब करने पर पता चला कि बैंक में उनका 25 लाख रुपया है, लेकिन जब उन्होंने बैंक से पैसा मांगा तो बैंक ने उन्हें यह कह कर टाल दिया कि उनका पैसा बैंक में जमा हुआ ही नहीं है। बैंक के बाहर प्रदर्शन कर रहे एक मजदूर ने कहा कि वो रोजाना 50 रुपए बैंक में जमा करता था ताकि त्यौहारी सीजन में परिवार को मोटी रकम भेज सके, लेकिन त्यौहार आने से पहले ही उसके बैंक खाते को खाली कर दिया गया।
स्थानीय पार्षद महेश शर्मा ने बताया कि ऐसे सैकड़ों ग्राहक है जिनका पैसा इस बैंक में था। किसी के एक लाख तो किसी का तीस लाख। ग्राहकों को बैंक से बार-बार टाला जा रहा है। बैंक मैनेजर से जब ग्राहकों ने पैसा देने का दबाव डाला तो उन्होंने ग्राहकों को धमकी देते हुए कहा कि उनका पैसा बैंक में नहीं है जो करना है वे कर ले। महेश शर्मा ने कहा कि ग्राहकों ने बैंक के एजेंट काजल जो रोज पैसा कलक्शन करता था उसके खिलाफ बैंक में लिखित शिकायत दी है। बावजूद इसके बैंक की ओर से थाने में कोई शिकायत दर्ज नहीं करवायी गयी है।
काजल को फोन करने पर वो ग्राहकों को कहता था कि उसके परिवार के लोग बीमार है इसलिए वो नहीं आ सकता, लेकिन कुछ दिन बाद उसने फोन भी बंद कर दिया। महेश शर्मा ने आरोप लगाया कि पहले ये सिंडिकेट बैंक था। बाद में इसे कैनरा बैंक में विलय कर दिया गया। ग्राहकों से पैसा लेने के बाद उन्हें जो रशीद दी जाती थी वो फर्जी और सिंडिकेट बैंक की थी जो बाद में पूरी तरह से बंद भी कर दी गयी।
महेश शर्मा ने बैंक के विरुद्ध थाने में शिकायत दर्ज करवायी है और ग्राहकों के साथ बैंक के बाहर धरना प्रदर्शन भी शुरू किया है। बैंक के बाहर प्रदर्शन कर रहे मछुआ के फल विक्रेता शिवकुमार सोनकर ने कहा कि मैं रोजाना 500 से 600 रुपए बैंक में जमा करता था क्योंकि मेरे बेटे के ब्रेन में समस्या है जिसके इलाज के लिए लाखों रुपए की जरूरत है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए ही मैंने रेकरिंग एकाउंट खोला था और उसमें पैसा जमा कर रहा था, लेकिन अब बैंक वाले ही मुझे पैसा नहीं दे रहे हैं, ऐसे में मैंने अपने बच्चे का इलाज कैसे करवाऊं।