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उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत न्याय यात्रा के मामले में कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने नरम रुख दिखाया है
कोलकाता। कांग्रेस छोडऩे के 24 घंटे के अंदर ही अटकलों पर मुहर लग गई। वकील कौस्तव बागची बीजेपी में शामिल हो गए। वह गुरुवार को बीजेपी दफ्तर गए और गेरुआ झंडा उठा लिया। कौस्तव ने बुधवार को कांग्रेस छोड़ दी थी। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े को तीन पेज का पत्र भेजा। उन्होंने वहां कहा कि कांग्रेस का प्राथमिक सदस्य पद छोड़ रहा हूं। कौस्तव लंबे समय से कांग्रेस की राजनीति से जुड़े रहे हैं। हालांकि, आरोप है कि हाल ही में उनकी पार्टी से बिल्कुल भी नहीं बन रही थी। वह समय-समय पर पार्टी के कई फैसलों का खुलकर विरोध करते रहे हैं। कांग्रेस छोडऩे के बाद सुना था कि अब बीजेपी में शामिल होने का वक्त आ गया है! वह अटकलें आज सच हो गईं। कौस्थव शुभेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हुए।
बीजेपी में शामिल होने के बाद कौस्तव बागची ने कहा कि अगर लोगों की जरूरतें पूरी नहीं होंगी तो राजनीति का कोई मतलब नहीं है। जहां प्रदेश कांग्रेस का कोई महत्व नहीं है। उस समूह के साथ रहने का कोई मतलब नहीं है। संदेशखाली पर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व चुप है। मुझे लगता है कि जिस तरह से कांग्रेस दिन-ब-दिन तृणमूल के प्रति नरम रवैया दिखा रही है, कोई भी व्यक्ति आत्मसम्मान के साथ उस पार्टी में नहीं रह सकता है। कौस्तव ने कहा कि कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संदेशखाली कांड पर प्रतिक्रिया दी है। लेकिन कांग्रेस की ओर से कोई बयान नहीं आया। पार्टी के भीतर भी इस पर असंतोष है। मुझे लगता है कि यहां रहना मेरे आत्मसम्मान के साथ समझौता है। इस तृणमूल के प्रति नरम रुख से राज्य में तृणमूल को उखाड़ फेंका नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि वह उस लड़ाई को लडऩे के लिए बीजेपी में शामिल हुए हैं। कौस्तव का दावा है कि तृणमूल गठबंधन की अवमानना कर रहा है। उनके शब्दों में, 'कांग्रेस तृणमूल के सामने भीख का कटोरा लेकर घूम रही है। विरोधी मानसिकता वाले लोग इसे बहुत अच्छी तरह से नहीं लेते हैं। परिणामस्वरूप, उनका कांग्रेस में रहना संभव नहीं है।Ó
कौस्तव के अनुसार, कांग्रेस में लोगों का एक बड़ा वर्ग जो महसूस करता है कि तृणमूल सरकार को हटाया जाना चाहिए, उसके पास कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत न्याय यात्रा के मामले में कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने नरम रुख दिखाया है। इस बार लोकसभा चुनाव लडेंगे के सवालपर हाल ही में कांग्रेस छोडऩे वाले नेता ने कहा कि मैं किसी भी शर्त पर पार्टी में शामिल नहीं हो रहा हूं। इस राज्य से अत्याचारी सत्तारूढ़ पार्टी को उखाड़ फेंकने के लिए शामिल हुआ हूं।
कौस्ताब के अलावा शंकर बंदोपाध्याय, सिद्धार्थ मजूमदार कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए। पिछले लोकसभा चुनाव में सिद्धार्थ मजूमदार कांग्रेस के उम्मीदवार थे। इस दिन बाल रोग विशेषज्ञ सौमित्र दत्ता भी बीजेपी में शामिल हुए।