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70 के दशक की वारदात फिर से हो रही है लोकल ट्रेन में, आतंक में यात्री
कोलकाता। हजारों यात्रियों के लेकर तेज गति से दौड़ती कोलकाता के लोकल ट्रेनों में एक बार फिर 70 के दशक का आंतक लौट आया हैं। बदमाशों का एक गिरोह इन दिनों लोकल ट्रेनों में सक्रिय हो गया हैं जो भीड़ में महिलाओं के केश काट रहा हैं। इस घटना से रेल में यात्रा करने वाली महिलाओं में दहशत का माहौल हैं। घटना को लेकर बागुईआटी की रहने वाली छात्रा ने आरपीएफ को आपबीती सुनायी। बारुईपुर के एक निजी कॉलेज की छात्रा ने आरपीएफ को आपबीती तो सुनाया लेकिन उसे अभी तक यह समझ नहीं आया है कि बुधवार शाम को क्या हुआ था। छात्रा बयान के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। छात्रा ने कहा कि घर लौटते समय वह सियालदह स्टेशन से 6.50 पर की दूरी पर नैहाटी लोकल के महिला कक्ष में चढ़ गई।
बागुइहाटी की रहने वाली युवती ने कहा कि वह अपने घर विधाननगर जाने के लिये कॉलेज से ट्रेन में चढ़ी थी। छात्रा ने आरपीएफ को बताया कि उसे अचानक कई बार ट्रेन के उस कमरे के अंदर बाल खिंचने का एहसास हुआ। उसे लगा कि शायद ट्रेन में भीड़ के कारण उसका केश दबा हुआ हैं। कई बार इस तरह की घटना होती रही। कुछ ही देर बाद ट्रेन विधाननगर स्टेशन पर पहुँची तो छात्रा ट्रेन से उतरी और प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर बने सबवे से चलने लगे। वो आगे बढी तभी उसे महसूस हुआ कि उसके बाल अभी भी कोई खींच रहा हैं। छात्रा डर गयी और जब पीछे पलट कर देखा तो उसे एक युवक दिखाई दिया। उनसे पूछा गया कि ये क्या हो रहा है? तो उस युवक ने कहा की मैंने कुछ भी नहीं किया। छात्रा इस घटना से डर गयी और सहमी सहमी घर लौट आई। घर लौटने के बाद जब उसने अपने बालों पर हाथ फेरा तो उसके हाथ में बालों के गुच्छे आ रहे हैं। डर के मारे रात भर सो नहीं सकी। इसके बाद सुबह उन्होंने अपने जमाई को इसकी जानकारी दी जो हाईकोर्ट के वकील हैं।
घटना की सूचना मिलने के बाद पीडि़त छात्रा अपने जमाई के साथ रेल पुलिस के समक्ष पहुँची और मामले की शिकायत की। आरपीएफ ने युवती को सियालदह बुलाया। सीसीटीवी फुटेज में वह चलती ट्रेन में तो दिखी, लेकिन पीछे कोई ऐसी हरकत कर रहा हैं ऐसा कुछ भी नजर आया। आरपीएफ की टीम अब विधाननगर स्टेशन की सीसीटीवी फुटेज इक_ा कर रही है।
आरपीएफ ने कहा कि अपराधी की पहचान वहीं से हो सकेगी। गौरतलब है कि सत्तर के दशक के मध्य में ट्रेनों में इसी तरह महिलाओं के बाल काट दिये जाते थे। यही नहीं खास तौर पर चोटियां काट दी जाती थी। जो तरीका इस्तेमाल किया गया वह यह था कि चोटी के एक हिस्से को धागे से ऊपर-नीचे बांध दिया जाता था ताकि इसे महिलाओं के लिए अदृश्य बनाया जा सके। इसके बाद बालों बंडल के बीच का हिस्सा काट दिया गया। कटी हुई चोटी नीचे नहीं गिरती थी जिसके कारण महिला को इसका अहसास तक नहीं हो सका। 70 के दशक की अपराध के वापस लौटने से रेल में यात्रा करने वाली महिलाएं आंतकित हैं।