न्यायाधीश ने अंतरिम आवेदन को खारिज करते हुए अपने फैसले में उस बिंदु का उल्लेख किया
कोलकाता। विधाननगर नगर पालिका वार्ड नंबर 35 के मेयर जयदेव नस्कर एक बार फिर हाई कोर्ट के निशाने पर आ गए। कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर अवैध क्लब को तोडऩे से रोकने पर क्लब के अध्यक्ष जयदेव और सचिव तरूण मंडल पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
नगर निगम के वार्ड नंबर 28 के नयापट्टी में आदित्य स्मृति संघ नामक क्लब को तोडऩे का आदेश हाइकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम प्रशासन को दिया था। जयदेव उस क्लब के अध्यक्ष हैं। जमीन का मालिक होने का दावा करने वाले एक परिवार ने आदेश का पालन न करने पर निगम आयुक्त के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला दायर किया। उस मामले में दिए गए आदेश पर नगर निगम ने हाल ही में क्लब को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है। तब जयदेब ने क्लब की ओर से कोर्ट की अवमानना के मामले में हाई कोर्ट में इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन दायर की थी। अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई और बताया गया कि नगर निगम ने यह सत्यापित किए बिना विध्वंस कार्य शुरू कर दिया कि जिस जमीन पर क्लब स्थित है, वह सरकार द्वारा अधिग्रहित की गई थी या नहीं।
न्यायाधीश अमृता सिंह ने अंतरिम आवेदन को खारिज कर दिया और क्लब को अवैध बताया और आवेदक और जयदेव पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया। मालूम हो कि नयापट्टी निवासी प्रमाणिक परिवार ने कुछ साल पहले उस क्लब को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। परिवार ने अदालत को बताया कि क्लब उनकी ज़मीन हड़प कर बनाया गया था। उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार, बिधाननगर नगर पालिका, क्लब के पास वैध डिजाइन नहीं है। इसलिए नगर पालिका ने इसे अवैध घोषित कर गिराने का आदेश दिया। उस आदेश के खिलाफ क्लब के अध्यक्ष जयदेव व सचिव ने हाइकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में केस दायर किया। वे दोनों जगह हार गए। दोनों अदालतों ने नगर पालिका के फैसले को बरकरार रखा और जॉयदेव के मामले को खारिज कर दिया। क्लब को तोडऩे में दो बार रुकावटें आने के बाद नगर निगम और पुलिस वापस लौट गयी। न्यायाधीश ने अंतरिम आवेदन को खारिज करते हुए अपने फैसले में उस बिंदु का उल्लेख किया।
न्यायाधीश को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि एक मामले को दो अदालतों द्वारा खारिज किए जाने के बाद अंतरिम आवेदन दायर किया गया था। उन्होंने आवेदकों के लापरवाह रवैये पर भी टिप्पणी की। बिना किसी डिजाइन के क्लब के निर्माण को अवैध बताते हुए जस्टिस सिंह ने कहा कि थोड़ी सी रियायत मिलने पर भी इस क्लब को तोडऩे का काम पूरा नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ताकत दिखाकर अवैध निर्माण करने वाले बेईमान अवैध बिल्डरों को रियायत नहीं दी जाएगी। आपने अंतरिम आवेदन क्यों दायर किया? जयदेव ने दावा किया कि कानूनी सलाह के साथ फाइलिंग की गई थी। हमें कानून के बारे में कुछ नहीं पता। कोर्ट का आदेश मानने से रोकने वालों को मैंने समझाया कि क्लब को टूटने से कोई नहीं रोक सकता। हालाँकि, अदालत के आदेश के बाद, मैं अब क्लब से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं था। कलकत्ता हाई कोर्ट ने 18 अप्रैल तक यह बताने का आदेश दिया है कि जुर्माना भरा गया है या नहीं और क्लब को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है या नहीं।
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