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बंगाल की लड़ाई में सीएए का कॉकटेल, क्या फिर चौंकाएगा कूचबिहार?

अनुसूचित जाति में इस इलाके में कोच और राजवंशी समुदाय के लोगों की संख्या बहुत ही अधिक है

12 Apr 2024

बंगाल की लड़ाई में सीएए का कॉकटेल, क्या फिर चौंकाएगा कूचबिहार?

कोलकाता। स्वतंत्रता के पहले 1586 से 1949 तक कूचबिहार सियासत थी। यहां कोच राजाओं का शासन था। कूचबिहार अपने सुंदर पर्यटक स्थलों के अतिरिक्त आकर्षक मन्दिरों के लिए भी पूरे विश्व में जाना जाता है। ईट से निर्मित कूचबिहार की राजबाड़ी की गणना दुनिया के सात खूबसूरत महलों में से होती है। कोच राजवंशी समुदाय ने इस खूबसूरत महल को बनाया था। इसके साथ ही भारत-बांग्लादेश की सीमा बहुत ही नजदीक है। इस कारण इस जिले में बांग्लादेशी घुसपैठियों से लेकर तस्करी की समस्या सामने आती रही है और बीएसएफ के साथ गोलीबारी की घटनाएं भी घट चुकी हैं। इसे लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी की सरकार बीएसएफ पर निशाना साधते रही है। भारत-बांग्लादेश की सीमा से सटा कूचबिहार संसदीय क्षेत्र राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील रहा है। 
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य में 18 सीटों पर जीत हासिल की थी। कोच और राजबंशी बहुल इस इलाके में तृणमूल कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए निशिथ प्रमाणिक ने जीत हासिल की थी। उन्होंने टीएमसी के परेश चंद्रा अधिकारी को पराजित किया था। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने फिर से निशिथ प्रमाणिक को उम्मीदवार बनाया है तो वही तृणमूल ने जगदीश चंद्र बासुनिया को मैदान में उतरा हैं जबकि इस शीट पर वाममोर्चा के उम्मीदवार के रूप में नीतिश चंद्र रॉय और कांग्रेस के टिकट पर प्रिया राय चौधरी मैदान में हैं। 
कूच बिहार लोकसभा सीट जहां 19 अप्रैल को पहले चरण में मतदान होना है, भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहा। यदि भाजपा को अपने 400 पार लक्ष्य तक पहुंचना है तो उसे तीन सीटें बरकरार रखनी होंगी और यदि तृणमूल कांग्रेस बंगाल में भाजपा की वृद्धि को रोकना चाहती है तो उसे कूचबिहार के साथ साथ उत्तर बंगाल की सभी तीन सीटें छीननी होंगी। उत्तर बंगाल की सीटों की जनसांख्यिकीय संरचना को देखते हुए सीएए के गुण और दोष केंद्र में आ गए। भूटान, नेपाल और सबसे महत्वपूर्ण बांग्लादेश की सीमा से लगा बंगाल का क्षेत्र, बांग्लादेश से बड़ी संख्या में प्रताडि़त हिंदुओं, आदिवासियों और अन्य हाशिये पर रहने वाले समुदायों का भी घर है। हाशिए पर रहने वाले समुदाय के लोगों की बड़ी संख्या के कारण भी तीन सीटें आरक्षित की गई हैं। पहले चरण में अलीपुरद्वार (एसटी), कूच बिहार (एससी) और जलपाईगुड़ी (एससी) की आरक्षित सीटों पर 19 अप्रैल को मतदान होगा। 
नागरिकता संशोधन अधिनियम के लाभार्थियों के रूप में, अनुसूचित जाति के शरणार्थियों के एक हिंदू संप्रदाय, कई मतुआओं को सीएए के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान किए जाने की उम्मीद है। बंगाल में लगभग 30 लाख की आबादी वाले मटुआ समुदाय की उत्तरी बंगाल की सीमावर्ती सीटों, अलीपुरद्वार, कूच बिहार और जलपाईगुड़ी में भारी सघनता है और यह राज्य की एससी आबादी का लगभग 16' है। राजबोंगशी समुदाय, दिनाजपुर क्षेत्र और बांग्लादेश सीमा के साथ उत्तरी बंगाल में एक और एससी समुदाय, की अनुमानित आबादी 33 लाख से अधिक है, जो राज्य की एससी आबादी का लगभग 18' है। 2019 के लोकसभा चुनावों में, 19 अप्रैल को कूच बिहार सहित सभी तीन सीटें भाजपा ने ममता बनर्जी की टीएमसी से छीन लीं। साल 2011 की जनगणना के अनुमान के अनुसार कूचबिहार सीट पर कुल 2265726 जनसंख्या में से 89.87' ग्रामीण और 10.13' शहरी आबादी है। अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का अनुपात क्रमश: 48.59 और 0.51 है। 2021 की मतदाता सूची के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में 1884968 मतदाता और 2594 मतदान केंद्र हैं। अनुसूचित जाति में इस इलाके में कोच और राजवंशी समुदाय के लोगों की संख्या बहुत ही अधिक है। 
7 विधानसभा सीटों में से 5 पर बीजेपी का कब्जा
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कूचबिहार लोकसभा क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्र सीटें हैं। सात विधानसभा सीटों में से पांच पर बीजेपी का कब्जा है, जबकि दो पर टीएमसी का कब्जा है। माथाभांगा (एससी) से बीजेपी के सुशील बर्मन, कूचबिहार उत्तर (एससी) से बीजेपी के सुकुमार रॉय, कूचबिहार दक्षिण से बीजेपी के निखिल रंजन डे, सीतलकुची (एससी) से बीजेपी के बरेन चंद्र बर्मन, सिताई (एससी) से टीएमसी के जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, दिनहाटा से टीएमसी के उदयन गुहा और नटबारी से बीजेपी के मिहिर गोस्वामी विधायक हैं, हालांकि मिहिर गोस्वामी ने पाला बदल लिया है और टीएमसी में शामिल हो गये हैं। इस तरह से सात में तीन सीटों पर टीएमसी का कब्जा है।
2019 में पहली बार खिला था कमल
साल 2019 में भाजपा के निसिथ प्रमाणिक ने टीएमसी के परेश चंद्रा अधिकारी को हराकर कूचबिहार लोकसभा क्षेत्र में 54,231 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। निसिथ प्रमाणिक को 7,31,594 वोट मिले थे। 2019 के संसदीय चुनाव में मतदाता मतदान 84.08' था, जबकि 2014 के संसदीय चुनाव में यह 82.62' था। साल 2019 के संसदीय चुनाव में टीएमसी, भाजपा और कांग्रेस को क्रमश: 44.43', 47.98' और 1.85' वोट मिले, जबकि 2014 के संसदीय चुनाव में टीएमसी, भाजपा और कांग्रेस को क्रमश: 39.51', 16.34' और 5.59' वोट मिले थे। 
कूचबिहार चुनावी इतिहास
निशिथ प्रमाणिक के पहले इस सीट पर टीएमसी के सांसद पार्थ प्रतिम थे। वह साल 2016 के लोकसभा उपचुनाव में निर्वाचित हुए थे। पार्थ प्रीतम को कुल 794375 वोट मिले थे। 
वहीं दूसरे नंबर 381134 वोट के साथ बीजेपी के हेमचंद्र भ्रमण रहे थे। टीएमसी ने करीब चार लाख से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी। उसके पहले साल 2014 में टीएमसी की रेणुका सिन्हा सिन्हा को 5,26, 499 वोट मिले थे। उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक के दीपक कुमार राय को पराजित किया था। उस समय चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार हेमचंद्र बर्मन 2,17653 मतों के साथ तीसरे नंबर रहे थे। यह सीट काफी लंबे समय तक फॉरवर्ड ब्लॉक के कब्जे में ही रही। साल 2009 में फॉरवर्ड के नृपेन नाथ राय, साल 2004 में फॉरवर्ड ब्लॉक के हितेन बर्मन , साल 1999 के चुनाव में फॉरवर्ड ब्लॉक के अमर राय प्रधान तथा साल 1998 के लोकसभा चुनाव में फॉरवर्ड ब्लॉक के अमर राय प्रधान सांसद निर्वाचित हुए थे। 
2019 का रिजल्ट
भाजपा : 7,31,594
तृणमूल : 6,77,363
माकपा : 6,77,363
कांग्रेस : 28,215
2021 का रिजल्ट
सिताई : तृणमूल
दिनहाटा : तृणमूल
नाटाबाड़ी : भाजपा
शितलकूची : भाजपा
माथाभांगा : भाजपा
कूचबिहार उत्तर : भाजपा
कूचबिहार दक्षिण : भाजपा
2024 के उम्मीदवार
तृणमूल : जगदीश चंद्र बासुनिया
भाजपा : नीशिथ प्रमाणिक
कांग्रेस : प्रिया राय चौधरी
माकपा : नीतिश चंद्र रॉय
कुुल मतदाता: 18,84,968
कुल बूथ: 2594
मतदान: 19 अप्रैल

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