यह टोर्सा नदी के तट प पर स्थित है। राज्य में भारतीय एक सौ गैंडों की सबसे बड़ी आबादी इस अभ्यारण्य में है
कोलकाता। कांग्रेस देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल में से एक है और पहले चुनाव से आज तक उसका जनाधार लगभग सभी क्षेत्रों में बरकरार रहा है लेकिन एक लोकसभा सीट ऐसी भी रही है जिसमें आज तक कांग्रेस कभी जीत नहीं पाई है।
पिछले चुनाव में भाजपा के सांसद भी यहां से चुनकर आए थे लेकिन कांग्रेस का खाता नहीं खुला है। ये सीट उत्तर बंगाल का अलीपुरदुआर लोकसभा केन्द्र हैं। आजाद भारत का पहला आम चुनाव 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 के बीच हुआ। उस वक्त उत्तर बंगाल से केवल तीन लोकसभा सीटें थीं, जो धीरे-धीरे बढ़कर आज आठ हो गई हैं। इनमें मात्र एक सीट अलीपुरदुआर को छोड़ कर बाकी सभी सीटों पर पहले सांसद कांग्रेसी थे। अलीपुरद्वार संसदीय क्षेत्र पश्चिम बंगल के कूचबिहार और जलपाईगुड़ी में स्थित है।
हालांकि अलीपुरद्वार पहले जलपाईगुड़ी का ही हिस्सा था, लेकिन 25 जून 2014 को जलपाईगुड़ी से अलग करके 20वां जिला बनाया गया। अलीपुरद्वार जिले में नगर पालिका और छह सामुदायिक विकास जैसे अलीपुरद्वार-1, अलीपुरद्वार-2,फालाकाटा, मदारीहाट-बीरपारा, कालचीनी और कुमारग्राम हैं। इसके छह ब्लॉकों में 66 ग्राम पंचायतें और नौ शहर हैं। अलीपुरद्वार अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्व विख्यात है। अलीपुरद्वार में दो राष्ट्रीय स्तर के अभ्यारण्य हैं। यहां बक्सा नेशनल पार्क स्थित है। यहां बाघों के लिए 760 वर्ग किलोमीटर (290 वर्ग मील) जंगल का रिजर्व है। पार्क में पाए जाने वाले जानवरों में बाघ, सिवेट, हाथी, गौर (भारतीय बाइसन), भारतीय सूअर और लाल जंगली मुर्गी शामिल हैं। इसी तरह से राष्ट्रीय उद्यान जलदापाड़ा वन्यजीव अभयारण्य अलीपुरद्वार जिले में पूर्वी हिमालय की तलहटी में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान है। यह टोर्सा नदी के तट प पर स्थित है। राज्य में भारतीय एक सौ गैंडों की सबसे बड़ी आबादी इस अभ्यारण्य में है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
अलीपुरद्वार संसदीय क्षेत्र उत्तर बंगाल का अनुसूचित जाति का आरक्षित सीट है। इस सीट पर साल 2019 में बीजेपी ने पहली बार जीत हासिल की। यह सीट साल 1977 में अस्तित्व में आई थी और तब से लेकर साल 2009 तक इस संसदीय सीट पर वामपंथी दल रेवोलुशनरी सोशस्लिट पार्टी (आरएसपी) का कब्जा रहा था। इस सीट पर केवल एक बार ही टीएमसी के उम्मीदवार को जीत मिली है, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी ने इस सीट को टीएमसी छीन लिया। बीजेपी के उम्मीदवार जॉन बारला ने टीएमसी के दशरथ तिर्की को पराजित कर इस सीट पर जीत हासिल की। जॉन बारला फिलहाल इस संसदीय क्षेत्र से बीजेपी के सांसद हैं और केंद्रीय अल्पसंख्यक राज्य मंत्री हैं, लेकिन इस बार जॉन बारला को टिकट नहीं मिला है। उनकी जगह विधानसभा में मुख्य सचेतक मनोज टिग्गा को उम्मीदवार बनाया गया है जबकि तृणमूल ने इस सीट से प्रकाश चिक बरईक को उतारा है तो वही आरएसपी ने मीली ओरान को मैदान में उतारा हैं।
साल 2014 के चुनाव में टीएमसी के दशरथ तिर्की ने जीत हासिल की थी। उन्हें 3,62,453 वोट के साथ 29.46 फीसदी मत मिले थे, जबकि आरएसपी के मनोहर तिर्की 3,41,056 मत के साथ 27.72 फीसदी मत मिले थे। आरएसपी को 13.50 फीसदी मत का नुकसान का सामना करना पड़ा था। भाजपा के बीरेंद्र बारा उरांव 3,35,857 मत (27.30 फीसदी) के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे। कांग्रेस के जोसेफ मुंडा को 1,16,718 मत के साथ 9.49 फीसदी मत मिले थे। नोटा में 19,885 मत पड़े थे। इसी तरह से साल 2009 के लोकसभा चुनाव में आरएसपी के मनोहर तिर्की को 384,890 वोट के साथ 41.22 फीसदी मत मिले थे।
उन्होंने टीएमसी के पबन कुमार लाकड़ा को पराजित किया था। उन्हें 272,068 वोट के साथ 29.14 फीसदी मत मिले थे। भाजपा के मनोज टिग्गा 199,843 (21.40 फीसदी) वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे। 1977 से लेकर 2009 तक इस सीट पर आरएसपी का ही कब्जा था।
80त्न अनुसूचित जाति और जनजातियों की आबादी
अलीपुरद्वार संसदीय क्षेत्र में मुख्य रूप से ग्रामीण आबादी है। इसकी कुल आबादी का 80 प्रतिशत से अधिक एससी/एसटी समुदाय से हैं। यह राजबंशी, राभा, मेच, संथाल, मदसिया, बोडो और टोटो और ओरांव जैसी विभिन्न जातीय जनजातियों का गृहनगर है। 2011 की जनगणना के अनुमान के अनुसार इस संसदीय सीट की कुल जनसंख्या 2139688 है। इसमें 82.54' ग्रामीण और 17.46' शहरी आबादी है। अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति का कुल जनसंख्या में अनुपात क्रमश: 30.23 और 26.16 है। 2021 की मतदाता सूची के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में 1719822 मतदाता और 2358 मतदान केंद्र हैं।
साल 2019 में बीजेपी ने पहली बार हासिल की जीत
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के जॉन बारला ने एआईटीसी के दशरथ तिर्की को हराकर अलीपुरद्वार लोकसभा क्षेत्र में 2,43,989 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। जॉन बारला को 7,50,804 वोट मिले, जबकि टीएमसी के दशरथ तिर्की को 5,06,815 वोट मिले।
आरएसपी की मिली ओरांव 54,010 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहीं। कांग्रेस के मोहनलाल बसुमाता को मात्र 27,427 वोट मिले। नोटा में 21,175 मत मिले। 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 83.71' मतदान हुआ था। इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल 8 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। इस सीट परपंजीकृत मतदाताओं की संख्या 16,48,383 थी। साल 2019 के संसदीय चुनाव में मतदाता मतदान 83.79' था, जबकि 2014 के संसदीय चुनाव में यह 83.3' था। 2019 के संसदीय चुनाव में टीएमसी, भाजपा और कांग्रेस को क्रमश: 36.72', 54.4' और 1.99' वोट मिले, जबकि 2014 के संसदीय चुनाव में टीएमसी, भाजपा और कांग्रेस को क्रमश: 29.62', 27.45' और 9.54' वोट मिले।
2019 का रिजल्ट
भाजपा : 7,50,804
तृणमूल : 5,06,815
आरएसपी : 54,010
कांग्रेस : 27,427
2021 का रिजल्ट
तूफानगंज : भाजपा
कुमारग्राम : भाजपा
कालचीनी : भाजपा
अलीपुरदुआर : भाजपा
फालाकाटा : भाजपा
मदारीहाट : भाजपा
नागरकाटा : भाजपा
2024 के उम्मीदवार
भाजपा : मनोज टिग्गा
तृणमूल : प्रकाश चिक बरईक
आरएसपी : मीली ओरान
मतदान: 19 अप्रैल
मतदाता : 17,19,822
कुल बूथ : 2,358