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दार्जिलिंग का राजनीतिक दृष्टि के साथ भौगोलिक दृष्टि काफी महत्वपूर्ण स्थान है
कोलकाता। दार्जिलिंग लोकसभा सीट जिसे भाजपा का सबसे सेफ सीट माना जाता रहा हैं लेकिन 2024 के चुनाव में इस सीट को लेकर भाजपा की टेंशन बढ़ गयी हैं। नामांकन प्रक्रिया के साथ साथ नामांकन वापस लेने की तारीख भी खत्म हो गयी हैं और भाजपा के लिये खुद उनके ही विधायक विष्णु प्रसाद शर्मा ने परेशानी बढ़ा दी हैं। इस बार दार्जिलिंग लोकसभा केन्द्र से कुल 14 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे है जिसमें भाजपा के कर्सियांग से विधायक विष्णु प्रसाद शर्मा भी शामिल है जिन्होंने पार्टी के विरूद्ध बगावत कर निर्दलिय उम्मीदवार के रूप में लड़ रहे है। दार्जिलिंग सबसे चर्चा में दो निर्दल उम्मीदवार कर्सियांग के विधायक विष्णुप्रसाद शर्मा उर्फ बीपी बाजगायेन और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा नेता वंदना राई हैं।
राजनीतिक हलकों का मानना है कि इन दोनों उम्मीदवारों से भाजपा का दबाव बढ़ गया है। हालांकि, भाजपा की दार्जिलिंग अध्यक्ष कल्याण दीवान दो निर्दलियों को महत्व देने से हिचक रहे हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि राजू बिष्ट इस बार भी बड़े अंतर से जीतेंगे। नामांकन पत्र वापस लेने की समय सीमा बीतने के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने उम्मीदवारों को सिंबल दे दिये हैं।
निर्दलीय प्रत्याशी विष्णुप्रसाद शर्मा को सेफ्टी पिन और बंदना राय डोर बेल चुनाव चिह्न मिला है। कार्सियांग के भाजपा विधायक विष्णुप्रसाद पार्टी के फैसले के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं, क्योंकि उन्हें राजू बिष्ट पसंद नहीं है।
भाजपा की टेंशन यही खत्म नहीं हो रही हैं बल्कि भाजपा के लिये एक और टेंशन बिमल गुरुंग की करीबी गोरखालैंड आंदोलन के नेताओं में से एक वंदना राई ने राजू बिष्ट को समर्थन देने के फैसले को स्वीकार नहीं कर सकीं है। इसलिए वह निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। ये दोनों मुख्य रूप से गोरखा वोटों को लक्ष्य करके मैदान में उतरे हैं और दोनों ने भाजपा विरोधी रुख अपनाया है। इससे तृणमूल कांग्रेस और भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा गठबंधन के उम्मीदवार गोपाल लामा को फायदा होगा, ऐसा राजनीतिक हलकों का मानना है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
दार्जिलिंग का राजनीतिक दृष्टि के साथ भौगोलिक दृष्टि काफी महत्वपूर्ण स्थान है। पूर्वी हिमालय में स्थित दार्जिलिंग क्षेत्र के पश्चिम में नेपाल, उत्तर में भारतीय राज्य सिक्किम, पूर्व में भूटान, सुदूर उत्तर में चीन का तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और दक्षिण और दक्षिण-पूर्व में बांग्लादेश स्थित है। यह संसदीय सीट नेपाल, भूटान, चीन और बांग्लादेश से करीब होने के कारण कूटनीतिक दृष्टि से भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस लोकसभा सीट से बीजेपी इस सीट पर हैट्रिक लगा चुकी है।
साल 2009 में जसवंत सिंह, साल 2014 में एसएस अहलूवालिया और साल 2019 में राजू बिष्ट ने इस संसदीय सीट पर जीत हासिल की है, लेकिन ऐसा नहीं है कि भाजपा ने अपने दम पर इस सीट पर जीत हासिल की है, बल्कि गोरखाओं की पार्टी गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के समर्थन से बीजेपी ने इस सीट पर जीत हासिल की है और टीएमसी को मात दी है। फिलहाल राजू बिष्ट से संसदीय सीट से बीजेपी के सांसद हैं और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं।
लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी ने फिर से राजू बिष्ट को उम्मीदवार बनाया है। पर्यटन के लिए महशूर होने के साथ-साथ दार्जिलंग राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। यहां बसे गोरखा लंबे समय से अलग गोरखालैंड की मांग कर रहे हैं और अलग गोरखालैंड की मांग को लेकर कई उग्र आंदोलन भी हो चुके हैं, हालांकि राज्य में सत्तारूढ़ पार्टियां लगातार अलग गोरखालैंड की मांग खारिज करती रही है.
नेपाली भाषा और अप्रवासी मजदूरों की जमावड़ा
दार्जिलिंग की आबादी आज बड़े पैमाने पर स्वदेशी और आप्रवासी मजदूरों का बड़ा हिस्सा है, हालांकि उनकी आम भाषा, नेपाली भाषा है, जिसे सरकार ने मान्यता दी है। साल 2017 को दार्जिलिंग जिले को विभाजित कर अलग कालिम्पोंग जिला बनाया गया था। यह राज्य का 21वां जिला है। दार्जिलिंग लोकसभा तीन जिलों की विधानसभा सीटों से मिलकर बना है। एक दार्जिलिंग जिला, दूसरा कालिम्पोंग जिला और तीसरा उत्तर दिनाजपुर जिले का चोपड़ा विधानसभा क्षेत्र मिलकर संसदीय सीट बना है।
भाजपा का गढ़ बन गया है दार्जिलिंग
साल 2009 में परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार दार्जिलिंग संसदीय सीट में कुल सात विधानसभा सीटें हैं। बीजेपी का पांच विधानसभा केंद्रों पर कब्जा है। कलिम्पोंग में बीजेपीएम के रुडेन सदा लेप्चा, दार्जिलिंगमें बीजेपी के नीरज जिम्बा, कर्सियांग में बीजेपी के बिष्णु प्रसाद शर्मा, माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी (एससी) में बीजेपी के आनंदमय बर्मन, सिलीगुड़ी में बीजेपी के शंकर घोष, फांसीदेवा (एसटी) में बीजेपी के दुर्गा मुर्मू, चोपड़ा उत्तर में टीएमसी के हमीदुल रहमान विधायक हैं। 2019 के संसदीय चुनाव में मतदाता मतदान 78.8' था, जबकि 2014 के संसदीय चुनाव में यह 79.51' था।
2019 के संसदीय चुनाव में टीएमसी, बीजेपी, सीपीएम और कांग्रेस को क्रमश: 26.56', 59.19', 3.99' और 5.14' वोट मिले, जबकि टीएमसी, बीजेपी, सीपीएम और कांग्रेस को 25.48', 42.75' वोट मिले। , 2014 के संसदीय चुनाव में क्रमश: 14.64' और 7.89' वोट मिले।
2019 का रिजल्ट
भाजपा: 7,50,067
तृणमूल: 3,36,624
कांग्रेस: 65,186
2021 का रिजल्ट
कलिम्पोंग: बीजीपीएम
दार्जिलिंग: भाजपा
कर्सियांग: भाजपा
माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी: भाजपा
सिलीगुड़ी: भाजपा
फांसीदेवा: भाजपा
चोपड़ा: तृणमूल
2024 के उम्मीदवार
भाजपा: राजू बिस्ता
तृणमूल: गोपाल लामा
कांग्रेस: डॉ. मुनीश तमांग
मतदान: 26 अप्रैल
मतदाता: 16,99,267
कुल बूथ: 2,371