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मारे गये गुलफाम! बाबावाद को शिखर तक पहुंचाने वाले रामदेव का तिलिस्म भी अब समाप्ति की ओर है

लेकिन बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि आज के बड़े लाला (बिजनेस मैन) में शामिल बाबा रामदेव को भी कभी दो वक्त के खाने का मोहताज होना पड़ा होगा।

27 Apr 2024

 मारे गये गुलफाम!  बाबावाद को शिखर तक पहुंचाने वाले रामदेव का तिलिस्म भी अब समाप्ति की ओर है

भारत के प्राचीन आरोग्य कला योग क्रिया की जब बात आती है तो सबसे पहले दिमाग में बाबा रामदेव का नाम आता है। संन्यासी से बाबा रामदेव आज बिलिनियर्स की लिस्ट में शामिल हो गये हैं। वो इस मुकाम को हासिल करने में कामयाब रहे। शायद ही कोई बाबा रामदेव के योगगुरु से लेकर बिजनेस के बाहुबली बनने तक के सफर के बारे में जानता होगा। गुरु शंकरदेव से संन्यास दीक्षा लेने वाले बाबा थोड़े ही समय में देश के जाने-माने उद्यमियों से अधिक मशहूर हो गये हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि आज के बड़े लाला (बिजनेस मैन) में शामिल बाबा रामदेव को भी कभी दो वक्त के खाने का मोहताज होना पड़ा होगा।

बाबा का पूरा नाम रामकृष्ण यादव है। रामदेव जी योगासन व प्राणायाम योग में महारत रखते हैं। अब तक देश-विदेश के करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से योग सिखा चुके हैं। सन् 1995 में पतंजलि का कंपनी के रूप में बाबा व उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने महज 13 हजार रुपये में पतंजलि का रजिस्ट्रेशन कराया था। वह भी किसी तरह दोस्तों से उधारी लेकर। हरियाणा फिर राजस्थान में छोटे-छोटे योग शिविर चलाने वाले रामदेव कैसे मालामाल हुए बताते हुए कहते हैं कि उनके ट्रस्ट का मकसद आमलोगों के बीच योग और आयुर्वेद को लोकप्रिय बनाना रहा। पहले उन्हें पचास हजार रुपये का दाम मिला था उसी से उन्होंने आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का कारोबार शुरू किया था जो आज हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। साल 1995 में दिव्य योग ट्रस्ट, 2006 में पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट बना और तीसरा भारत स्वाभिमान ट्रस्ट बाबा रामदेव एक के बाद एक अपने ट्रस्ट बनाते चले गये और बाबा का आर्थिक साम्राज्य फूलता फलता चला गया।

बाबा के ट्रस्ट की संपत्ति के बारे में बात करें तो पिछले वित्त वर्ष में बाबा ने दिव्य योग मंदिर और पतंजलि योगपीठ का कुल टर्न ओवर 1100 करोड़ रुपये बताया था। बाबा के हरिद्वार में दिव्य फार्मेसी से हर साल 50 करोड़ रुपये की आय होती है। 500 करोड़ की लागत से बनने वाला फूड पार्क भी आमदनी का अच्छा स्रोत है। बाबा योग कैम्प लगाते हैं जिससे हर साल 25 करोड़ रुपये की कमाई होती है। बाबा की किताबों और सीडी का बिक्री से 2-3 करोड़ रुपये की आय होती है।

बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के नाम 34 कंपनियां हां जिनका टर्न ओवर 265 करोड़ रुपये है। यह जानकारी सरकार ने लोकसभा में दी थी। बालकृष्ण उत्तराखंड में पंजीकृत 23 कंपनियों के निदेशक हैं जिनका कारोबार 94.84 करोड़ रुपये है। ऐसी कई प्रदेशों में उनकी कंपनियां पंजीकृत है जिनका कुल कारोबार 163.06 करोड़ रुपये है।

साल 2002 में गुरु शंकरदेव की खराब सेहत के चलते बाबा रामदेव दिव्य योग ट्रस्ट का चेहरा बने जबकि उनके दोस्त बालकृष्ण ने ट्रस्ट के पाइनेंस का जिम्मा संभाला। अंतोतगत्वा गुरुकुल के जमाने के ये तीनों दोस्त पतंजलि योगपीठ के आर्थिक साम्राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं। वर्ष 2002 में गुरु शंकर देव की कथित तौर पर बीमारी फिर उनकी हत्या का मामला आज तक सुलझा नहीं है। कहा जाता है कि उनकी कथित हत्या में उनके शिष्यों का हाथ है क्योंकि उनके जाने के बाद ही ट्रस्ट ने जम के योग का व्यापार पनपाया।

यह भी अजब बात हुई कि बाबा रामदेव ने खुलकर अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार  हटाओ आंदोलन में बढ़ चढक़र हिस्सा लिया तथा योग शिविरों को देश और देश से बाहर लोकप्रिय बनाया तथा उनमें भाजपा के पक्ष में खुलकर अभियान चलाया। बढ़-चढक़र बड़े बड़े झूठ बोले गए ।भाजपा को जब कथित भगवाधारी का साथ मिला तो बल्ले-बल्ले हो गई। इसी लगाव की ओट में बाबा ने नकली सामानों का बड़ा बाज़ार प्राप्त कर लिया ठीक वैसे ही जैसे अडानी ने मोदी को पकड़ कर देश और विदेश में अपना कारोबार जमा लिया।और ये दोनों विश्व के अरबपतियों की सूची में आ गए।

यूं तो व्यापार और प्रेम में सब जायज़ माना जाता है किंतु जब अति हो जाती है तो इसका दुखद परिणाम भी सामने आता है। आज बाबा रामदेव कोरोनिल गोली के विज्ञापन मामले में बुरी तरह फंसे हुए हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने पतंजति के 2022 के एक विज्ञापन में एलोपैथी पर गलतफहमी फैलाने का आरोप लगाया था।  अफ़सोसनाक तो ये भी है कि इसका प्रचार भारत सरकार ने भी किया जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस पर प्रतिबंध लगाने कहा था।जब सारा उत्पाद बिक गया तब इस पर प्रतिबंध लगा।यह लोगों के जीवन से खिलवाड़ का मामला है तथा सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है हालांकि बाबा ने अदालत से दो बार अखबार के ज़रिए माफी मांगी है किंतु अदालत ने इसे माफी लायक ना समझते हुए इसे जारी रखने कहा है।इस तरह के नकली सामान के कई मामले छोटी अदालतों में आए किंतु वे रफ़ा दफ़ा हो गए।

लगता है, बाबावाद को शिखर तक पहुंचाने वाले रामदेव का तिलिस्म भी अब समाप्ति की ओर है उनका धर्म और अर्थ के समन्वय पर टिका साम्राज्य पूर्णत: राजनीति के संरक्षण में पनपा है जिससे धर्म, आयुर्वेदिक दवाएं और राजनैतिक माहौल प्रदूषित हुआ है। आज जिस तरह इलैक्ट्रोरल बांड के कांड का भंडाफोड़ हुआ है यदि ईमानदारी से बाबाजी के कारोबार की शिनाख्त की जाए तो इसमें कई गुने धंधे की वृद्धि के बीज मिल सकते हैं जिनके पालन पोषण में सरकार भी जिम्मेदार मिलेगी।

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