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मौसम की मार से चाय के प्याली में आ सकता है महंगार्ई का उबाल

अगर अगले दस दिनों तक यही स्थिति बनी रहेगी और क्षेत्र में कोई वर्षा नहीं होगी तो यह गिरावट करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी

03 May 2024

मौसम की मार से चाय के प्याली में आ सकता है महंगार्ई का उबाल

दार्जिलिंग। उत्तर बंगाल के क्षेत्र में 500 से अधिक चाय बागान हैं। इस बागानों से पिछले साल सामूहिक रूप से लगभग 640 मिलियन किलोग्राम चाय का योगदान दिया था। चाय उत्पादन के लिए चेरापूंजी जैसा मौसम चाहिए। उत्तर बंगाल के अनुकूल मौसम के कारण ही 200 वर्ष पहले अंग्रेजों ने यहां चाय का उत्पादन प्रारंभ किया। आज इसकी खेती बंगाल की आर्थिक राजधानी के रूप में जग जाहिर है। इस बार पड़ रही गर्मी से चाय की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यही कारण है आने वाले दिनों में चाय के प्याले में महंगाई का उबाल आने वाला है। इस बार देश का कई हिस्सा भीषण गर्मी से जूझ रहा है। अनुमन अप्रैल महीने में गर्मी का एहसास उतना नहीं होता था, जितना इस साल के अप्रैल में देखने को मिला। इस बार अप्रैल महीने से चल रहे लू के थपेड़ों ने महीने की गर्मी का कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ा दिया है। 
साल 1901 के बाद से पहली बार ऐसा हुआ कि देश के अधिकतर भागों में अप्रैल में सबसे अधिक दिनों तक लू चली और मई माह में और लू चलने और गर्मी बढऩे की संभावना है। इस अप्रैल से शुरू हुई भीषण गर्मी ने उत्तरी बंगाल में चाय उद्योग के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। अप्रैल से पड़ रही भीषण गर्मी और इस बार यहां कम बारिश से चाय की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। इससे फसल के उत्पादन में गिरावट के अनुमान हैं। ऐसे में आने वाले समय में बाजार में चाय महंगी हो सकती है।
उत्तर बंगाल के क्षेत्र में 500 चाय बागान हैं। इस बागानों से पिछले साल सामूहिक रूप से लगभग 640 मिलियन किलोग्राम चाय का योगदान दिया था। इस बार पड़ रही गर्मी से चाय की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अधिक तापमान और पार्यप्त बारिश न होने से चाय की झाडिय़ाँ लाल हो जाती हैं और पत्तियों की वृद्धि रुक जाती है। इससे उद्योग में 30-35 प्रतिशत फसल की कमी हो जाती है। इस बार कुछ ऐसी ही स्थिति है। इसको देखते हुए कुछ चाय बागानों ने झाडिय़ों को बनाए रखने के लिए कृत्रिम सिंचाई प्रणालियों का सहारा लिया है। 
सिलीगुड़ी के चाय बागान मालिक नारायण अग्रवाल ने कहा कि चाय गुणवत्ता और मात्रा दोनों के लिए 28-30 डिग्री सेल्सियस के बीच के तापमान में सबसे अच्छी तरह पनपती है। इस सीमा से ऊपर का कोई भी तापमान चाय की वृद्धि के लिए प्रतिकूल है। चाय एक बारिश वाली फसल है। अगर बारिश होती है तो उद्योग कायम रहेगा, अन्यथा यह टिकाऊ नहीं होगा। उद्योग अवांछित मध्यम वृद्धि महसूस कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप 35 प्रतिशत तक फसल की कमी हो जाएगी, जो चाय के भविष्य के बाजार को परेशान करेगी। अगर अगले दस दिनों तक यही स्थिति बनी रहेगी और क्षेत्र में कोई वर्षा नहीं होगी तो यह गिरावट करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। 
सिलीगुड़ी कॉलेज के भूगोल विभाग के प्रोफेसर पार्थ प्रतिम रॉय ने कहा कि पिछले साल इस क्षेत्र में कुछ बारिश हुई थी, लेकिन इस साल अब तक बारिश का पूर्ण अभाव रहा है। रॉय ने कहा, वर्षा की कमी चाय उद्योग के लिए बेहद खराब है और पत्तियों की वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। 
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि मई में देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज होने की संभावना है। विभाग ने गुरुवार के लिए गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और झारखंड में भीषण गर्मी की स्थिति के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। आईएमडी के अनुसार, कई स्थानों पर लू चलने की संभावना है और गंगीय पश्चिम बंगाल के पूर्वी और पश्चिमी बर्दवान, बीरभूम, मुर्शिदाबाद, बांकुरा, पुरुलिया, झाडग़्राम, पश्चिम मिदनापुर जिलों में एक या दो स्थानों पर गंभीर लू चलने की संभावना है।
 

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