वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
अदालत ने कहा कि मामला बहुत प्रारंभिक चरण में है और लोकसभा चुनाव का छठा चरण शनिवार को होना है
कोलकाता। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को भाजपा नेता शुभेन्दु अधिकारी के परिसरों पर हाल ही में की गई छापेमारी के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस की आलोचना की। साथ ही कोर्ट ने पूछा कि क्या पुलिस ने राज्य में किसी भी सत्तारूढ़ दल के नेता के खिलाफ इसी तरह कार्रवाई की होगी। न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने अधिकारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान पुलिस को फटकार लगाई। याचिका में 21 मई को कोलाघाट में सुवेंदु अधिकारी के कार्यालय-सह-निवास में घुसने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। याचिका में अधिकारियों को परिसर में घुसने से रोकने का आदेश देने की भी मांग की गई है।
अदालत ने अधिकारी के खिलाफ 17 जून तक कार्रवाई करने पर रोक लगाते हुए पुलिस से कहा कि अगर आप कुछ दिन इंतजार करेंगे तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा। कोर्ट ने उन आरोपों की जांच पर भी रोक लगा दी, जिनके संबंध में छापेमारी की गई थी। न्यायालय ने छापेमारी करने में पुलिस की तेजी पर सवाल उठाया और टिप्पणी करते हुए कहा कि जब आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू होती है, तो केवल फ्लाइंग स्क्वाड ही ऐसी कार्रवाई कर सकता है। न्यायमूर्ति सिन्हा ने पूछा कि काश आपको सत्तारूढ़ दल के नेताओं के बारे में ऐसी जानकारी मिलती। तब क्या आपने इतनी तेजी दिखाई होती? पुलिस 22 मई को पूर्व मेदिनीपुर जिले के कोलाघाट में एक मकान पर छापा मारने गई थी, जिसे अधिकारी के वकील ने उनका कार्यालय और आवास बताया था।
अदालत ने कहा कि मामला बहुत प्रारंभिक चरण में है और लोकसभा चुनाव का छठा चरण शनिवार को होना है। अदालत ने पुलिस को प्राथमिकी पर 17 जून तक आगे बढऩे से रोक दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि मामला 10 जून को फिर से सुनवाई के लिए सूची में आएगा। न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की पीठ ने राज्य को चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से कराने के उद्देश्य से कोई भी कदम उठाने की जरूरत उत्पन्न होने पर अदालत का रुख करने की स्वतंत्रता दी। अधिकारी ने पुलिस छापेमारी को अवैध बताते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था और दावा किया था कि उनके मौलिक अधिकार का हनन किया गया है। उन्होंने कहा था कि छापेमारी से पहले पुलिस को नोटिस देना चाहिए था।
उन्होंने मामले में कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगाने और चुनाव परिणाम घोषित होने के एक सप्ताह बाद तक पुलिस को इस तरह की छापेमारी करने से रोकने का अनुरोध किया था। बंगाल सरकार ने अनुरोध का विरोध करते हुए दावा किया कि अधिकारी के पास याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि वह उस सम्पत्ति के मालिक नहीं हैं जहां छापा मारा गया और न ही उस संपत्ति से किसी भी तरह से जुड़े हैं। राज्य सरकार के वकील ने कहा कि संपत्ति के लिए समझौता मालिक और सुरजीत दास नामक व्यक्ति के बीच है। राज्य के वकील ने दावा किया कि पुलिस को इस बात की जानकारी नहीं थी कि अधिकारी उक्त संपत्ति में रह रहे हैं। राज्य के वकील ने कहा कि कुछ सूचनाओं के आधार पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्वत: संज्ञान लेकर एक प्राथमिकी दर्ज की, जिसमें कहा गया कि छापा मारा गया और कोई आपत्तिजनक चीज बरामद नहीं हुई।