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कोलकाता। आखिर पार्षद को निशाना क्यों बनाया गया? आखिर कौन था जो पार्षद की हत्या करवाना चाहता था? पार्षद के हत्या करवाने के पीछे की कारण क्या राजनीतिक है या फिर आपसी रंजिश के कारण पार्षद की हत्या बिहार के सुपारी किलर से करवाने की योजना बनायी गयी थी? ऐसे कई सवाल हैं जिसका जवाब पुलिस मुख्यालय लालबाजार तलाश रही है। जैसे जैसे पुलिसिया जांच आगे बढ़ रही हैं वैसे वैसे इस मामले में कई चौकाने वाले खुलासे भी हो रहे हैं। एक तरफ जहां पार्षद की सुरक्षा कड़ी कर दी गयी हैं तो दूसरी तरफ पार्षद के घर के निकट स्थित तालाब में गोताखोरों को लगाया गया हैं।
पुलिस को आशंका हैं कि इस हत्याकांड की साजिश से जुड़े कई राज इस तालाब में हो सकते है। पुलिस की माने तो ये पहली बार नहीं हैं जब हत्या तकी साजिश रची गयी हो। वार्ड 108 के पार्षद व बोरो चेयरमैन सुशांत घोष पर हमले की साजिश अक्टूबर महीने में भी रची गई थी। यह बात खुद पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार अफरोज खान उर्फ गुलजार ने स्वीकार किया है। उसने कहा है कि शूटर को खेल खत्म करने और शोर ना मचाने के लिए भेजा गया था। हालांकि साथ में ये भी बताया गया था कि सुशांत घोष को मारना नहीं है बल्कि केवल डर दिखाने के लिए बंदूक का इस्तेमाल करना है।
बताया जा रहा है कि यह पूरी योजना अक्टूबर महीने में ही बनकर तैयार हो गई थी। बिहार से आए अपराधियों ने यहां पर रेकी तक की थी। उस समय योजना पूरी नहीं होने के कारण वे लोग वापस भी लौट गए थे। हालांकि 15 नवंबर के लिए पूरी तरह से तैयार होकर कॉन्ट्रैक्ट लेकर हमला किया गया था। वही सुशांत घोष पर हुए हमले के बाद से उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पहले से ही सुशांत घोष के पास दो पुलिस कांस्टेबल सुरक्षा में रहा करते थे। अब इसकी संख्या में इजाफा कर दिया गया है।
वहीं कोलकाता पुलिस की तरफ से सुशांत घोष के घर के पास के तालाब को खंगालने का काम जारी है। पुलिस को शक है कि तालाब में हथियारों का जखीरा छुपा कर रखा हुआ है। जानकारी के मुताबिक गुलजार ने कहा है कि सुशांत के प्रति उनका गुस्सा लंबे समय से है। वह पहले उसे मारना चाहता था। इसलिए बिहार से शूटरों को हायर किया गया था। पूरा कॉन्ट्रैक्ट 10 लाख रुपए में बनाने की तैयारी थी। हालांकि बाद में बहुत ही कम कीमत पर शूटर तैयार हो गए। रंगे हाथ पकड़े गए शूटर युवराज सिंह ने बाकी लोगों के नाम बता दिए हैं। वही यह भी बताया है कि पार्षद को केवल डराने के लिए सुपारी दी गई थी। गुलजार का दावा है युवराज के अलावा स्कूटी चालक के पास ही बंदूक थी उसे कहा गया था कि अगर वह पकड़ा जाता है तो वह क्रॉस फायरिंग करें।
वहीं मेयर फिऱहाद हकीम ने कल कहा था कि कोलकाता पुलिस का इंटेलिजेंस क्या कर रहा है। क्यों नहीं हथियारों को जब्त किया जा रहा है। क्यों नेटवर्क के पास इसकी खबर नहीं पहुंची। साथ उन्होंने सुशांत घोष को एक जांबाज नेता करार दिया था और कहा था कि 21 जुलाई 1993 को भी सुशांत घोष पर आंदोलन के दौरान हमला हो चुका है।वह 4 महीने अस्पताल में थे लेकिन दिन रात और ममता बनर्जी जिंदाबाद ही कहते रहे। सुशांत में हमले वाली घटना के बाद कहा था कि मैं राजनीति छोड़ दूंगा लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से फोन पर बातचीत होने के बाद और मेयर फिऱहाद हकीम द्वारा उनके घर जाकर मुलाकात करने के बाद सुशांत घोष ने कहा है कि वह चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन राजनीति नहीं छोड़ेंगे और वह इस प्रकार के हमले से डरने वाले नहीं है।