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फिलहाल, आरोपित जेल हिरासत में हैं, और जांच जारी है
कोलकाता। आरजी कर अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं का मामला लगातार सुर्खियों में है। सीबीआई ने अदालत में जानकारी दी है कि अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और उनके करीबी सहयोगी अफसर अली बाइक पार्किंग से भी पैसे वसूलते थे।
सीबीआई ने दावा किया कि पूछताछ के दौरान गवाहों ने बताया कि बाइक पार्किंग से वसूले गए पैसे सीधे संदीप घोष और अफसर अली के पास जाते थे। इसके अलावा, अफसर पर आरोप है कि उन्होंने अवैध रूप से ठेके लेकर अपने करीबी लोगों को फायदा पहुंचाया। सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ है कि अफसर अली को अस्पताल में स्थायी कर्मचारी नहीं, बल्कि अनुबंधित आधार पर नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति के लिए स्वास्थ्य विभाग को सूचित नहीं किया गया था।
जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि अस्पताल के तीन स्थायी कर्मचारियों के इस्तीफे के बाद स्थानीय स्तर पर अफसर सहित तीन लोगों को नियुक्त किया गया था। गुरुवार को इस मामले की सुनवाई अलीपुर विशेष सीबीआई अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान, अफसर अली ने जमानत याचिका दायर की। उनके वकील ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर बाइक पार्किंग से पैसे वसूले गए हैं, तो वे पैसे कहां हैं? क्या बैंक खाते में कोई राशि पाई गई? सीबीआई ने इसका जवाब देते हुए अदालत को बताया कि फर्जी कंपनियों ने अस्पताल के कई ठेके हासिल किए व दस्तावेजों में हेरफेर कर अवैध रूप से लाभ उठाया।
सीबीआई ने संदीप और उनके करीबी सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि अस्पताल के भीतर कैफे बनाने और विकास कार्यों के ठेके बिना स्वास्थ्य विभाग को सूचित किए, अफसर की कंपनियों को दिए गए। सीबीआई ने अदालत को बताया कि अफसर अली की बोगस कंपनियों को ठेके देने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर किया गया। इन कार्यों के लिए निर्माण विभाग को शामिल करने के बजाय, स्थानीय स्तर पर निर्णय लिए गए। सीबीआई ने कहा है कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और अफसर अली की भूमिका को विस्तार से समझाया गया है। फिलहाल, आरोपित जेल हिरासत में हैं, और जांच जारी है।
अहम साबित हो सकता है फोरेंसिक चिकित्सक का बयान
अगस्त महीने में आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर में महिला जूनियर डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले में जांच कर रही सीबीआई के लिए फोरेंसिक टीम के एक डॉक्टर का बयान बेहद अहम हो गया है। इस डॉक्टर ने शव परीक्षण से पहले पीडि़ता के शरीर की तस्वीरें ली थीं।
सूत्रों के अनुसार, फोरेंसिक टीम के इस डॉक्टर ने कुछ अन्य सदस्यों द्वारा इस मामले को आत्महत्या के रूप में पेश करने की कोशिश का कड़ा विरोध किया था। इस विरोध के साथ ही उन्होंने अपने मोबाइल फोन से पीडि़ता के शरीर की तस्वीरें लीं। सीबीआई ने इन तस्वीरों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।
सीबीआई इस मामले में आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व विवादित प्राचार्य संदीप घोष और कोलकाता के टाला पुलिस स्टेशन के पूर्व एसएचओ अभिजीत मंडल के खिलाफ भी जांच कर रही है। इन दोनों पर मामले की जांच को गुमराह करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने का आरोप है।