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'मुझे फंसाया जा रहा, एक आईपीएस इसमें शामिल'
कोलकाता। सियालदह अदालत ने शनिवार को आरजी कर बलात्कार और हत्या मामले में मुख्य आरोपी संजय रॉय को दोषी पाया। सियालदह अदालत के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने जब फैसला पढ़ा, उसके बाद संजय रॉय ने खुद को बेगुनाह करार दिया और कहा कि उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है। संजय ने कहा कि एक आईपीएस अधिकारी उस घटना में शामिल था जिसके कारण 9 अगस्त को चिकित्सक की मौत हो गई थी।
कोर्ट में न्यायाधीश के समक्ष खुद को बेकसुर बताते हुए संजय ने आगे कहा कि मैंने ऐसा नहीं किया है। जिन लोगों ने ऐसा किया है उन्हें जाने दिया जा रहा है। एक आईपीएस अधिकारी शामिल है। मैं हमेशा अपनी गर्दन पर रुद्राक्ष की एक चेन पहनता हूं। यदि मैंने अपराध किया होता तो घटना के स्थान पर मेरी चेन टूट जाती। मैं यह अपराध नहीं कर सकता। जेल सूत्रों की मानें तो एक दिन पहले तक वह लॉकअप में शांत था। उसने केवल अपने वकील से ही बात की।
वहीं कोर्ट मे जज ने कहा, तुम्हें सजा जरूर मिलेगी। सोमवार को कोर्ट संजय रॉय की सजा का ऐलान करेगा। कोर्ट ने कहा कि फरेंसिक रिपोर्ट से पता चलता है कि संजय रॉय इस अपराध में शामिल था। उसका डीएनए भी घटनास्थल पर पाया गया है। कोर्ट ने कहा, जिस तरह से पीडि़ता की तुमने हत्या की है, तुम्हें आजीवन कारावास या फिर मौत की सजा दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 के तहत 10 साल की सजा और धारा 66 के तहत 25 साल की जेल, उम्रकैद या फिर मौत की सजा हो सकती है। संजय रॉय को फिलहाल जेल भेज दिया गया है। सोमवार को सीबीआई के सबूतों का विश्लेषण करने का बाद सजा का ऐलान किया जाएगा उसे धारा 64 (रेप) और 103 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया गया है।
संजय रॉय की दोषसिद्धि को किसी अदालत में चुनौती देने की योजना नहीं : अपराधी की बहन
आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात महिला प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में संजय रॉय को दोषी ठहराए जाने के चंद मिनटों बाद, उसकी बड़ी बहन ने शनिवार को कहा कि इस आदेश को किसी भी अदालत में चुनौती देने की उसके परिवार की कोई योजना नहीं है। दुपट्टा से चेहरा ढकी इस अधेड़ महिला ने भवानीपुर इलाके में एक झुग्गी में संवाददाताओं से कहा कि वह सियालदह अदालत नहीं गई थी, जहां उसके भाई को पेश किया गया था और अदालत ने उसे दोषी करार दिया था। जब संवाददाताओं ने उससे पूछा कि क्या उसे लगता है कि उसका भाई वास्तव में दोषी है, तो उसने कहा, ''कृपया मुझे अकेला छोड़ दें। हम टूट चुके हैं। रॉय की बहन ने कहा, ''अगर उसने (रॉय ने) कोई अपराध किया है, तो उसे उचित सजा मिलनी चाहिए। हमारे पास आदेश को चुनौती देने की कोई योजना नहीं है। मैं अपने ससुराल में रह रही हूं। वर्ष 2007 में अपनी शादी के बाद से मेरा अपने परिवार से कोई संपर्क नहीं है, जबकि मेरी मां की तबीयत ठीक नहीं है।ÓÓ महिला ने अपनी पहचान या नाम उजागर न करते हुए कहा कि उसका भाई बचपन में किसी भी सामान्य लड़के की तरह ही व्यवहार करता था।
उसने कहा, ''जैसे-जैसे वह बड़ा हुआ, उसने शराब पीना शुरू कर दिया, लेकिन इसके अलावा मैंने खुद कभी भी संजय द्वारा किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार किए जाने का कोई मामला नहीं सुना। बेशक, पिछले कुछ सालों में हमारा उससे नियमित संपर्क नहीं था और वह एक अलग इलाके में रहता था, इसलिए मुझे उसके संबंधों के बारे में कोई जानकारी नहीं है और न ही वह यह जानती है कि मेरा भाई किसी आपराधिक मामले में शामिल था या नहीं।
शंभुनाथ पंडित अस्पताल के सामने उसी इलाके में रहने वाली रॉय की मां ने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया। उसने कहा, ''मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है। कृपया मुझे अकेला छोड़ दें। रॉय के रिश्तेदारों के घर तक रिपोर्टर को ले जाने वाले पड़ोस के लोग उस घर के पास जमा हो गए। पड़ोसी उमेश महतो ने कहा, ''अगर वह जघन्य अपराध का दोषी पाया जाता है तो उसे सजा मिलनी चाहिए। लेकिन अगर मामले में अन्य लोग शामिल हैं, तो उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए।