उन्होंने कहा, “हमारे पास वीडियो और ऑडियो सबूत हैं, जो प्रमाणित करते हैं कि पुलिस ने हर संभव शांति बनाए रखने की कोशिश की
कोलकाता। कोलकाता के विकास भवन में एसएससी पास बेरोजगार शिक्षकों के आंदोलन ने गुरुवार को हिंसक रूप ले लिया। आंदोलनकारियों के उग्र रवैए के चलते भवन में मौजूद पांच सौ से ज्यादा सरकारी कर्मचारी फंस गए, जिनमें गर्भवती महिलाएं और बीमार लोग भी शामिल थे। जब पुलिस ने उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश की, तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस झड़प में 19 पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालांकि पुलिस ने सात घंटे तक संयम बरतते हुए स्थिति को संभालने की कोशिश की।
शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए दक्षिण बंगाल के एडीजी सुप्रतिम सरकार ने रात के समय प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों पर लाठी चार्ज को लेकर उक्त सफाई दी। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों ने शुरुआत में शांतिपूर्वक धरना दिया, लेकिन गुरुवार को अचानक भीड़ बढ़कर ढाई हजार के करीब पहुंच गई। उन्होंने बैरिकेड तोड़ दिए और पुलिस के बार-बार अनुरोध के बावजूद परिसर खाली नहीं किया। आंदोलनकारी कहने लगे कि वे किसी सरकारी कर्मचारी को बाहर नहीं जाने देंगे।
एडीजी ने बताया कि विकास भवन में 55 सरकारी विभागों के 500 से 600 कर्मचारी कार्यरत हैं। शाम को जब कर्मचारी बाहर निकलना चाह रहे थे, तब आंदोलनकारियों ने उन्हें घेर लिया। इस दौरान एक गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ गई, एक महिला को अपनी बीमार मां के पास जाना था, लेकिन रास्ता बंद होने के कारण उन्होंने छलांग लगा दी, जिससे उनका पैर टूट गया।
पुलिस ने बार-बार माइक से अनुरोध किया कि जिन लोगों का आंदोलन से कोई संबंध नहीं है, उन्हें सुरक्षित निकलने दिया जाए, लेकिन आंदोलनकारियों ने उग्र रवैया अपनाया। मजबूरी में पुलिस को सीमित बल प्रयोग करना पड़ा ताकि फंसे हुए कर्मचारियों को बाहर निकाला जा सके।
एडीजी सुप्रतिम सरकार ने कहा, “लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सबको है, लेकिन दूसरों के अधिकारों का हनन कर किया गया प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं कहा जा सकता।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने पुलिस पर हमला किया और आंदोलन को उकसाया, उनकी पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि विरोधी दल लाठीचार्ज को लेकर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन पुलिस ने पूरे संयमत और धैर्य के साथ काम किया। उन्होंने कहा, “हमारे पास वीडियो और ऑडियो सबूत हैं, जो प्रमाणित करते हैं कि पुलिस ने हर संभव शांति बनाए रखने की कोशिश की।”