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राज्य में फिर बन सकता है कांग्रेस-बाम गठबंधन
कोलकाता। 2026 में बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले एक बार फिर कांग्रेस और वाम दलों के बीच गठबंधन की चर्चा तेज़ हो गई है। खासकर आगामी 19 जून को होने वाले कालिगंज विधानसभा उपचुनाव के मद्देनजऱ इस संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें ज़ोर पकड़ रही हैं। शुक्रवार को वामदलों की हुई बैठक के बाद इस पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
गौरतलब है कि 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में वाम दलों ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी दोनों दलों ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा। उस दौरान प्रदेश कांग्रेस की कमान अधीर रंजन चौधरी के पास थी, और कई चुनावों में दोनों दलों की साझेदारी दिखी। हालांकि, जब पिछले वर्ष अधीर चौधरी की जगह शुभंकर सरकार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने, तो दोनों दलों के रिश्तों में खटास आ गई। नवंबर 2024 में बंगाल की छह विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में वाम और कांग्रेस के बीच कोई गठबंधन नहीं हुआ था। इसके बाद कयास लगने लगे कि क्या 2026 के चुनाव में भी दोनों दल अलग-अलग रास्तों पर चलेंगे? लेकिन अब कुछ ही महीनों में परिस्थिति फिर बदलती दिख रही है। फरवरी 2025 में कालिगंज सीट से तृणमूल कांग्रेस के विधायक नासिरुद्दीन अहमद के निधन के बाद यहां उपचुनाव हो रहा है। तृणमूल ने उनकी बेटी अलिफा अहमद को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, यह सीट कभी कांग्रेस का गढ़ रही है। 2016 में वाम समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी शेख हसनुज्जामान ने यहां जीत दर्ज की थी। हालांकि 2021 में बाम-कांग्रेस गठबंधन के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा।
सूत्रों के अनुसार, इस बार वाम दल फिर से कांग्रेस प्रत्याशी का समर्थन कर सकते हैं। इसके पीछे 2026 के विधानसभा चुनाव की रणनीति बताई जा रही है। वाम मोर्चा अध्यक्ष बिमान बोस की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक में इस पर अंतिम निर्णय लिया गया है जिसकी घोषणा जल्द हो सकती हैं। बताया जा रहा है कि इस फैसले से एक ओर जहां वाम दलों के अंदर, विशेषकर सीपीएम और आरएसपी के बीच इस सीट को लेकर जो खींचतान चल रही थी, उसे सुलझाया जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस को यह संदेश भी दिया जा सकेगा कि वाम दल एक दीर्घकालिक गठबंधन के लिए गंभीर हैं।