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तोहा सिद्दीकी के बयान से गरमाई बंगाल की सियासत, तृणमूल खेमे में घमासान
कोलकाता। फुरफुरा शरीफ़ के पीरजादा तोहा सिद्दिक़ी के बयान बंगाल के मुसलमान अब 2026 में खतरनाक खेल खेलेंगे ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। उन्होंने यह बयान क़ासिम सिद्दीक़ी की राजनीतिक पदप्राप्ति पर नाराजगी जताते हुए दिया, जिसके बाद तृणमूल के भीतर ही प्रतिक्रिया की बाढ़ आ गई है। भरतपुर के तृणमूल विधायक हुमायूं कबीर, जो पहले ही पार्टी लाइन को लेकर खुलेआम असंतोष जताते रहे हैं, तोहा सिद्दीक़ी पर पलटवार करते हुए कहा कि तोहा सिद्दीक़ी कब क्या बोलते हैं, उसका कोई भरोसा नहीं। राजनीति में कोई दक्षता उनके अंदर नहीं है। ऐसा लगता है कि वे किसी के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्हें एक पीरजादा के तौर पर राजनीति से ऊपर उठकर बोलना चाहिए।
गौरतलब है कि हाल ही में हुमायूं को पार्टी की ओर से लास्ट वार्निंग भी दी गई थी, जिसके बाद उनके बयानों में थोड़ी नरमी आई है। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई तक मैं पूरी तरह हमारी नेता और सेनापति ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहूंगा। कैनिंग पूर्व से तृणमूल विधायक शौकत मोल्ला ने भी तोहा सिद्दीक़ी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कल आप ममता बनर्जी के विकास की तारीफ कर रहे थे, आज आप कुछ और बोल रहे हैं। फुरफुरा शरीफ़ के लोग कभी तृणमूल, कभी भाजपा, कभी सीपीएम, तो कभी आईएसएफ के लिए बोलते हैं। इससे मुस्लिम समाज को गुमराह करने की साजिश चल रही है और मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं।
तोहा सिद्दीक़ी ने दावा किया है कि 2026 के चुनाव में भांगड़ से नउशाद सिद्दीक़ी की फिर से जीत संभव है और इसके साथ ही आईएसएफ एक-दो और सीटें भी जीत सकती है। वहीं, हुमायूं ने कहा कि आईएसएफ अच्छा करेगा या नहीं, ये समय बताएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तोहा सिद्दीक़ी का बयान तृणमूल के मुस्लिम वोट बैंक में हलचल पैदा कर सकता है। मुस्लिम समुदाय को लेकर खतरनाक खेल जैसी भाषा ने न केवल राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है, बल्कि इससे तृणमूल के भीतर मुस्लिम नेतृत्व की एकता और रणनीति पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल की राजनीति में मुस्लिम मतों को लेकर जिस तरह की बयानबाज़ी तेज हो रही है, वह आने वाले दिनों में चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
तोहा सिद्दीक़ी के बयान और उस पर तृणमूल नेताओं की प्रतिक्रियाएं इस बात का संकेत हैं कि राज्य की राजनीति में अंदरूनी दरारें अब सतह पर आने लगी हैं।