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अब देखना है कि इन खुलासों के बाद कॉलेज प्रशासन और राज्य सरकार छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था को लेकर क्या सख्त कदम उठाती है
कोलकाता। कसबा लॉ कॉलेज गैंगरेप कांड के बाद, कॉलेज खुलने के दूसरे दिन ही पढ़ाई का माहौल लगभग खत्म था। तेज बारिश और खराब मौसम की वजह से छात्रों की उपस्थिति पहले ही कम थी, लेकिन जो छात्र-छात्राएं आए, उनमें ज्यादातर वे थे जिन्हें प्रोजेक्ट जमा करने की अंतिम तारीख थी। उन्हीं में मौजूद थीं आरोपी प्रमित मुखोपाध्याय की एक सहपाठी छात्रा, जिनका बयान कॉलेज के अंदर की हकीकत को उजागर करता है। उन्होंने खुलकर बताया कि हम एक ही क्लास में पढ़ते थे। हँसी-मजाक, सामान्य बातचीत सब होती थी। लेकिन कभी अंदाज़ा नहीं हुआ कि वह किसी इतने घिनौने अपराध में शामिल हो सकता है।
छात्रा ने कॉलेज प्रशासन और गैंगरेप मामले के मुख्य आरोपी मनोजित मिश्रा को लेकर जो बातें बताईं, वो बेहद चौंकाने वाली हैं। छात्रों की माने तो अगर किसी छात्र को कॉलेज के किसी काम से वाइस प्रिंसिपल (नयना चट्टोपाध्याय) से मिलना होता था, तो सीधे मिलने की इजाज़त नहीं थी। पहले उसे मनोजित से होकर जाना पड़ता था। यानी कॉलेज में छात्र-छात्राओं और प्रशासन के बीच मनोजित 'बिचौलिएÓ की भूमिका निभा रहा था। कॉलेज की दीवारों पर लिखा देखा गया था कि मनोजित दादा हमारे दिल में है। इस बारे में छात्रा ने कहा कि यह नारा कोई सीनियर ने नहीं लिखा था। मनोजित के दबाव में यह सब पहले सेमेस्टर के छात्रों से लिखवाया गया। यानी, एक तरह से छात्रों से जबरन 'ग्लोरिफिकेशन' करवाया गया।
छात्रा का दावा है कि वाइस प्रिंसिपल खुद भी इस दबाव से अछूती नहीं थीं, मैडम खुद बहुत प्रेशर में रहती थीं। किसी भी फैसले की ताकत उनके हाथ में नहीं थी। एक ओर जहां आरोपी सहपाठी प्रमित को लेकर हैरानी और अविश्वास की भावना है, वहीं दूसरी ओर कॉलेज में मनोजित मिश्रा का दबदबा, सत्ता और प्रभुत्व किस स्तर तक था, वो भी सामने आ रहा है। छात्रों और प्रशासन के बीच वह ऐसा सिस्टमेटिक कंट्रोलिंग लिंक बन गया था, जहां हर छोटी-बड़ी चीज उसके ज़रिये तय होती थी। गैंगरेप की घटना के बाद जो प्रशासन और राजनीतिक जुड़ाव की परतें खुल रही हैं, वो कॉलेज के भीतर के 'अलोकतांत्रिक और डर के माहौलÓ को उजागर कर रही हैं। अब देखना है कि इन खुलासों के बाद कॉलेज प्रशासन और राज्य सरकार छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था को लेकर क्या सख्त कदम उठाती है।