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आदेश के बावजूद नहीं टूटा अडिय़ादह का तीन मंजिला मकान, अब 28 जुलाई को सुनवाई
कोलकाता। अडिय़ादह इलाके में कुख्यात जयंत सिंह उर्फ 'जयंत' के अवैध तीन मंजि़ला मकान को लेकर नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल, मकान को गिराने के लिए निगम की ओर से पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है, लेकिन तय समयसीमा 16 जुलाई बीत जाने के बावजूद अब तक न तो जवाब मिला और न ही कोई कार्रवाई हुई है। दरअसल जेल के चाहरदिवारी में कैद जयंत के तीन भाई प्रकाश कुमार सिंह (कचरा प्रबंधन विभाग), प्रशांत सिंह (जल आपूर्ति विभाग) और प्रियंत सिंह (बाराहनगर नगरपालिका में फुटबॉलर पद पर)—तीनों ही नगर निगमों में स्थायी कर्मचारी हैं। अब सवाल उठ रहा है कि क्या इनकी पदस्थिति का फायदा उठाकर ही इस अवैध निर्माण को बचाने की कोशिश हो रही है? 10 जुलाई को कोर्ट के ओर से अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया गया था और कहा गया था कि मकान के निवासी 16 जुलाई तक नगरपालिका के प्रमुख गोपाल साहा से मिलें लेकिन तय तारीख निकल जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं आया। जयंत के भाई प्रकाश कुमार सिंह का दावा है कि जमीन उनके नाम पर है और सभी दस्तावेज़ नगर निगम को सौंपे जा चुके हैं। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार ज़मीन के मालिक दिलीप मुखोपाध्याय और नोनीगोपाल मुखोपाध्याय हैं। ऐसे में नोटिस भी इन्हीं के नाम पर जारी किया गया था। प्रकाश कुमार, जो कि कामारहाटी नगर निगम में काम करते हैं, उन्होंने ही नोटिस रिसीव किया था। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जब अवैध निर्माण हो रहा था, तब नगर निगम की ओर से कोई सख़्त कदम क्यों नहीं उठाया गया? अब जबकि कोर्ट ने भी घर तोडऩे का आदेश दिया है, तब भी निगम की ओर से ढिलाई क्यों?
इसे लेकर कामारहाटी नगर निगम के चेयरमैन गोपाल साहा ने कहा कि हमने दो बार नोटिस भेजा, लेकिन ज़मीन के असली मालिकों का कोई जवाब नहीं आया। अब जो लोग अवैध निर्माण कर रहे हैं, उन्हें नोटिस भेजा जाएगा। 28 जुलाई को बोर्ड मीटिंग में इस मुद्दे पर सुनवाई होगी। अब देखना होगा कि क्या वाकई 28 जुलाई को निगम कोई ठोस कदम उठाता है, या तीन मंजि़ला दूध-से-सफेद मकान में जयंत और उसका परिवार ऐसे ही चैन की नींद सोता रहेगा।