तारातला हादसे में पूर्व मेयर फिरहाद एवं दो पार्षदों के नाम शिकायत दर्ज; मरने वालों की संख्या हुई 17
दुकानों पर बांग्ला साइनबोर्ड अब अति अनिवार्य, नियम तोडऩे पर लाइसेंस नवीनीकरण रद्द : फिरहाद
कोलकाता। कोलकाता नगर निगम ने शहर की भाषा-संस्कृति की रक्षा के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। निगम के मासिक अधिवेशन में मेयर फिरहाद हकीम ने घोषणा की कि शहर के सभी दुकानों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को अब अपने साइनबोर्ड में बांग्ला भाषा को अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा। मेयर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी दुकान या प्रतिष्ठान ने यह नियम नहीं माना, तो उसका व्यापारिक लाइसेंस रिन्यू यानी नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। कोलकाता में यह नियम लागू होते ही, राज्य की भाषाई पहचान और सांस्कृतिक अस्मिता को लेकर सरकार का रुख अब और स्पष्ट हो गया है।
मेयर फिऱहाद हकीम ने अधिवेशन के दौरान स्पष्ट कहा कि आप अपने साइनबोर्ड में हिंदी, अंग्रेज़ी या किसी भी भाषा का प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन बांग्ला भाषा अब अनिवार्य है। हम भारतीय हैं, पर बंगाली भी हैं। अगर बंगाल में बांग्ला भाषा का उपयोग नहीं होगा, तो यह हमारे अस्तित्व पर प्रश्न है। तृणमूल के पार्षद अरूप चक्रवर्ती ने यह मुद्दा उठाया था कि शहर के मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्सों में अधिकतर साइनबोर्ड केवल अंग्रेजी में होते हैं, जो राज्य की मातृभाषा बांग्ला के प्रति उपेक्षा का संकेत है। उन्होंने कहा कि बंगाल में बांग्ला का उपयोग न होना अपमानजनक है। इसके जवाब में मेयर ने भरोसा दिलाया कि निगम जल्द ही इस विषय पर आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगा, जिसमें सभी व्यापारिक संस्थानों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे। अधिवेशन में नगर निगम ने शहरी प्रशासन को और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से एक नई सड़क-चिन्हांकन योजना की भी घोषणा की। इसके तहत शहर के सभी प्रमुख मार्गों पर डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे, जिसमें यह जानकारी होगी कि वह सड़क किस विभाग—एनएचएआई, केएमडीए, पीडब्ल्यूडी, या पोर्ट ट्रस्ट के अंतर्गत आती है। मेयर ने उदाहरण स्वरूप बताया कि पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत आने वाले मागर्: बीटी रोड, दमदम रोड, बासंती हाईवे, रेड रोड, रासमणि रोड, तारातल्ला फ्लाईओवर है। केएमडीए के अंतर्गत सनाई रोड, ट्रांसपोर्ट रोड, सीजीआर रोड इत्यादि है।यह कदम न केवल नगर प्रशासन को जवाबदेह बनाएगा, बल्कि विकास कार्यों में विभागीय भ्रम और देरी को भी कम करेगा। अधिवेशन में बउबाजार मेट्रो हादसे से प्रभावित लोगों का मुद्दा भी सामने आया। पार्षद विश्वरूप दे ने प्रश्न उठाया कि मेट्रो के चलते क्षतिग्रस्त भवनों में रह रहे लोगों का अभी तक पूर्ण पुनर्वास नहीं हुआ है।मेयर फिरहाद हकीम ने कहा कि कोलकाता मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने वादा किया था कि वह अगले 10 वर्षों तक इन परिवारों की जिम्मेदारी लेगा। लेकिन वह वादा अधूरा रह गया। आज जब मेट्रो सेवा शुरू हो गई है, अगर दोबारा कोई नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने के एमआरसीएल से इस विषय पर स्पष्ट नीति और उत्तरदायित्व निर्धारित करने की मांग की।
अधिवेशन में कोलकाता नगर निगम ने यह स्पष्ट कर दिया कि उसकी प्राथमिकताएं अब सिर्फ बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक अस्मिता, प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक सुरक्षा को भी समान रूप से महत्व दिया जाएगा। मेयर ने अंत में कहा, भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, पहचान का आधार होती है। कोलकाता को अगर ग्लोबल सिटी बनाना है, तो उसकी जड़ों को मजबूत करना जरूरी है।