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हालिया छापेमारी इसी मामले की जांच को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है
कोलकाता। बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक बड़ी भ्रष्टाचार जांच के सिलसिले में शनिवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो सीबीआई ने श्रीरामपुर से तृणमूल कांग्रेस के विधायक सुदीप्त रॉय के कोलकाता स्थित सिंथी इलाके के आवास पर छापेमारी की।
यह छापेमारी आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं और संसाधनों के दुरुपयोग से संबंधित जांच के तहत की गई। सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, दो सदस्यीय एक टीम शनिवार दोपहर विधायक सुदीप्त रॉय के आवास पर पहुंची, लेकिन वे उस समय मौजूद नहीं थे।
सूत्रों का कहना है कि यह छापेमारी आर.जी. कर अस्पताल में हुए खर्च, संसाधनों की खरीद और मशीनरी की अदला-बदली से संबंधित मामलों पर केंद्रित थी। सुदीप्त रॉय, जो कभी आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज की रोगी कल्याण समिति के चेयरमैन थे, पहले भी विवादों में घिर चुके हैं। पिछले वर्ष अगस्त में अस्पताल परिसर में एक महिला डॉक्टर की दुष्कर्म और हत्या की सनसनीखेज वारदात के बाद उन्हें इस पद से हटा दिया गया था और उनकी जगह डॉ. शांतनु सेन को नियुक्त किया गया था। हत्या के इस गंभीर मामले में एक सिविक वोलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया गया था। उसी दिन विधायक सुदीप्त रॉय अस्पताल पहुंचे थे, जिससे उनके व्यवहार और भूमिका को लेकर सवाल खड़े हुए थे।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने पिछले वर्ष गंभीर आरोप लगाए थे कि आर.जी. कर अस्पताल की महंगी मशीनें और अन्य संसाधन कथित रूप से विधायक सुदीप्त रॉय के निजी नर्सिंग होम में भेजे गए हैं। उन्होंने कहा था कि यह स्वास्थ्य विभाग के संसाधनों की खुली लूट है। विधायक ने इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया था कि उनका नर्सिंग होम 1984 में बना था और वाम मोर्चा शासन के दौरान उन्होंने इसे विकसित किया। उन्होंने चुनौती दी थी कि कोई भी व्यक्ति आकर उनके अस्पताल की जांच कर सकता है।
सीबीआई पिछले एक साल से आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल से जुड़े मामलों की जांच कर रही है। वित्तीय लेन-देन, उपकरणों की खरीद में अनियमितता, और अस्पताल परिसंपत्तियों के दुरुपयोग की कई परतें खुल चुकी हैं। इसी के तहत विधायक रॉय की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है।
पिछले वर्ष सितंबर में भी सीबीआई की क्राइम ब्रांच ने उनके आवास पर तलाशी अभियान चलाया था। हालिया छापेमारी इसी मामले की जांच को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।