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कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी भारत और रूस कंधे से कंधा मिलाकर चले : प्रधानमंत्री

इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और रूस कठिन से कठिन परिस्थितियों में हमेशा कंधे से कंधे मिलाकर चले हैं। दोनों नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा की तथा ऊर्जा, वित्त और आर्थिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।

01 Sep 2025

कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी भारत और रूस कंधे से कंधा मिलाकर चले : प्रधानमंत्री

नई दिल्ली। चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और रूस कठिन से कठिन परिस्थितियों में हमेशा कंधे से कंधे मिलाकर चले हैं। दोनों नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक परिस्थितियों पर चर्चा की तथा ऊर्जा, वित्त और आर्थिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर भारत-रूस संबंधों की गहराई और व्यापकता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी दोनों देश हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं। यह करीबी सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण है। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।

विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों नेताओं ने इस अवसर पर द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। विशेष रूप से, यूक्रेन में जारी संघर्ष और उससे जुड़े नवीनतम घटनाक्रमों पर भी गंभीर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति से कहा, “यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के विषय में हम लगातार चर्चा करते रहे हैं। हाल में किए गए शांति के सभी प्रयासों का हम स्वागत करते हैं। हम आशा करते हैं कि सभी पक्ष सकारात्मक ढंग से आगे बढ़ेंगे। संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करने और स्थाई शांति स्थापित करने का रास्ता खोजना होगा। यह पूरी मानवता की पुकार है।”

मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने आर्थिक, वित्तीय और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। उन्होंने इन क्षेत्रों में निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और आगे भी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता जताई। दोनों पक्षों ने विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की आवश्यकता को दोहराया।

प्रधानमंत्री ने अपने वार्ता के दौरान अपने शुरुआती वक्तव्य में कहा कि दिसंबर में भारत में होने वाले 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत करने के लिए भारत उत्सुक है। उन्होंने अपने संबोधन में राष्ट्रपति पुतिन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग और मित्रता ने भारत-रूस संबंधों को नई दिशा दी है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत, रूस के साथ सभी क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

वहीं दोनों नेताओं की बैठक से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां भी सामने आईं। राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक स्थल तक कार से यात्रा करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का लगभग दस मिनट तक इंतजार किया। उसके बाद दोनों नेता एक ही कार में यात्रा करते हुए आपसी मुद्दों पर चर्चा करते रहे।

द्विपक्षीय बैठक स्थल पर पहुंचने के बाद भी दोनों नेताओं ने कार में लगभग 45 मिनट तक बातचीत जारी रखी। इसके बाद उनकी द्विपक्षीय बैठक हुई, जो एक घंटे से अधिक समय तक चली। इस बैठक में भारत-रूस संबंधों को और बेहतर बनाने पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

कार में हुई मुलाकात की प्रधानमंत्री ने तस्वीर भी साझा की। उन्होंने एक्स पर कहा, “एससीओ शिखर सम्मेलन स्थल पर कार्यवाही में भाग लेने के बाद, राष्ट्रपति पुतिन और मैं द्विपक्षीय बैठक स्थल पर साथ-साथ गए। उनके साथ बातचीत हमेशा ज्ञानवर्धक होती है।”

वहीं शिखर सम्मेलन में भाग लेने से पहले भी प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच गर्मजोशी से मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने गले मिलकर मित्रता का परिचय दिया। इस अवसर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मौजूद थे। यह मुलाकात भारत-रूस संबंधों की मजबूती दर्शाती है।

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