वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
ईडी का दावा है कि सोना, गहने, फ्लैट और नकदी मिलाकर 60 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति जब्त की गई
कोलकाता। पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को नियुक्ति घोटाले से जुड़े नवम-दशम और एकादश-द्वादश वर्ग शिक्षक भर्ती मामले में सीबीआई की विशेष अदालत से जमानत मिल गई है। हालांकि, अभी उन्हें जेल से बाहर नहीं आना पड़ेगा, क्योंकि वे प्राथमिक भर्ती घोटाले की सीबीआई जांच में भी आरोपी हैं और उस मामले में जमानत नहीं मिली है।
बुधवार को अलीपुर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पार्थ चटर्जी सहित कई आरोपियों ने जमानत की अर्जी लगाई थी। अदालत ने 7,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। इस मामले में पूर्व मंत्री परेश अधिकारी और उनकी बेटी अंकीता अधिकारी को भी राहत मिली है। सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि हर केस की प्रकृति अलग है। इस भ्रष्टाचार ने समाज पर गहरा असर डाला है लेकिन अदालत ने उनकी दलील खारिज कर दी। पार्थ को ईडी के प्राथमिक भर्ती मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है। हालांकि, सीबीआई की जांच जारी है और अन्य मामलों में उन्हें अब भी जेल में रहना होगा। जुलाई 2022 में ईडी ने पार्थ के घर और करीबी अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट पर छापेमारी की थी। अर्पिता के टालीगंज और बेलघरिया स्थित फ्लैट से करीब 50 करोड़ रुपये नकद, 5 करोड़ रुपये के गहने और विदेशी मुद्रा बरामद हुई थी।
ईडी का दावा है कि सोना, गहने, फ्लैट और नकदी मिलाकर 60 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति जब्त की गई। पार्थ पर ग्रुप सी, ग्रुप डी और अन्य नियुक्ति घोटालों में भी आरोप हैं। सीबीआई ने अक्टूबर 2024 में उन्हें प्राथमिक भर्ती मामले में फिर गिरफ्तार किया। हाल ही में एसएससी भर्ती मामलों में चार चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं। चार्जशीट में पार्थ समेत कई बड़े अधिकारियों और नेताओं के नाम दर्ज हैं। पार्थ की जमानत का फैसला बंगाल की राजनीति में नई हलचल ला सकता है। तृणमूल कांग्रेस दूरी बनाए हुए है, जबकि विपक्ष इसे भ्रष्टाचार का सबूत बताकर राज्य सरकार पर हमले तेज कर रहा है।