कमिटी के एक अधिकारी ने कहा कि सहयोगी कर्मी लंबे समय से पुलिस की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं
कोलकाता। अगले साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। उससे पहले रोजगार के जरिए राजनीतिक संदेश देने की कोशिश ममता बनर्जी सरकार कर रही है । इसी क्रम में पुलिस भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। नवान्न सूत्रों के मुताबिक, त्योहार का मौसम खत्म होते ही राज्य सरकार पुलिस की निचली श्रेणी में भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगी। इस बार पहली बार सिविक वॉलंटियर, विलेज पुलिस और अन्य सहयोगी कर्मियों को भी कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा में बैठने का मौका मिलेगा। उनके लिए विशेष कोटा तय किया गया है। अब तक नियम था कि सहयोगी पुलिसकर्मी सीधे भर्ती परीक्षा नहीं दे सकेंगे। इससे उनके बीच लंबे समय से नाराजगी थी। कई पढ़े-लिखे युवक-युवतियां अस्थायी नौकरी पाकर भी स्थायी पद न मिलने से हताश हो रहे थे और दूसरी राह तलाशने लगे थे। इस असंतोष को दूर करने के लिए ही सरकार ने यह कदम उठाया है।
हाल ही में पश्चिम बंगाल पुलिस वेलफेयर कमिटी के प्रस्ताव को मानते हुए सरकार ने यह बदलाव किया है। कमिटी लंबे समय से मांग कर रही थी कि सहयोगी कर्मियों के लिए अलग कोटा बने और उम्र सीमा में छूट मिले। नए नियम के मुताबिक कॉन्स्टेबल भर्ती में सहयोगी पुलिसकर्मियों के लिए 15त्न कोटा रहेगा। अधिकतम उम्र सीमा 35 साल होगी। अनुमान है कि इस बार करीब 5 हजार सहयोगी कर्मी परीक्षा में बैठेंगे। भर्ती परीक्षा नवंबर में कराई जाएगी। हालांकि एक चुनौती है ज्यादातर सहयोगी कर्मी रोज थाना, ट्रैफिक या सुरक्षा ड्यूटी में व्यस्त रहते हैं। उनके पास पढ़ाई के लिए अलग समय निकालना मुश्किल है। इसी वजह से पुलिस वेलफेयर कमिटी ने ऑनलाइन ट्रेनिंग शुरू की है ताकि वे घर बैठे तैयारी कर सकें।
कमिटी के एक अधिकारी ने कहा कि सहयोगी कर्मी लंबे समय से पुलिस की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उनका योगदान अमूल्य है। अब उनके लिए स्थायी नौकरी का रास्ता खुल गया है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, इस फैसले से सरकार दोहरा फायदा उठाना चाहती है जैसे चुनाव से पहले रोजगार बढ़ाने का संदेश देना और सहयोगी पुलिसकर्मियों की पुरानी मांग पूरी कर राजनीतिक लाभ पाना। यानी, नवंबर की कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा सिर्फ पुलिस भर्ती नहीं, बल्कि राजनीति के लिहाज से भी बेहद अहम होने जा रही है।