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जगह-जगह पुलिसकर्मी वाहनों को नियंत्रित करने की कोशिश करते दिखे
कोलकाता। सोमवार को महानगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने आम लोगों के लिए यातायात को बड़ा संकट बना दिया। सुबह से ही दफ्तर जाने वालों को जाम का सामना करना पड़ा। जिन रास्तों पर आमतौर पर 20-25 मिनट में सफऱ पूरा हो जाता है, वहां सोमवार को यात्रियों को एक घंटे से भी अधिक समय लग गया।
पुलिस ने पहले ही घोषणा की थी कि रविवार और सोमवार को कई प्रमुख मार्गों पर यातायात नियंत्रित रहेगा। खासकर प्रधानमंत्री के काफि़ले की सुरक्षा को देखते हुए कई फ्लाईओवर और चौराहों को बंद कर दिया गया। सोमवार को जब यात्रियों ने देखा कि मां फ्लाईओवर पूरी तरह से बंद है, तो वीआईपी बाज़ार से साइंस सिटी तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रास्ता रोक दिया था। वैकल्पिक रास्तों पर भी स्थिति बेहतर नहीं रही। कई लोग पार्क सर्कस चार नंबर ब्रिज से जाने की बजाय ह्यूज रोड की ओर मुड़े, लेकिन वहां भी गाडिय़ों की भीड़ उमड़ पड़ी। ऊपर से सड़क पर गड्ढे और बारिश का गंदा पानी। दोपहिया वाहन चालकों को कभी फुटपाथ पर चढऩा पड़ा, तो कभी पानी के बीच से होकर निकलना पड़ा। एक यात्री ने बताया कि अगर चार पहिया वाहन में होता, तो शायद दफ़्तर पहुंचने में दोगुना समय लग जाता। स्कूटी होने के बावजूद मुश्किल से आगे बढ़ पा रहा था। ह्यूज रोड और सियालदह के आस-पास भी अफरातफरी रही। जगह-जगह पुलिसकर्मी वाहनों को नियंत्रित करने की कोशिश करते दिखे, लेकिन यात्रियों का आरोप था कि समन्वय की कमी साफ नजऱ आई।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस तरह रेड रोड और मां फ्लाईओवर पर पुलिस का विशेष इंतज़ाम था, वैसे इंतज़ाम अन्य रास्तों पर क्यों नहीं किए गए? कई दफ़्तर जाने वालों को तय समय से एक घंटे से डेढ़ घंटे देरी से पहुंचना पड़ा। एक कर्मचारी ने बताया कि आमतौर पर महेशतला से धर्मतला पहुंचने में एक घंटा लगता है, लेकिन सोमवार को वही रास्ता तय करने में ढाई घंटे लग गए। मेट्रो सेवा में भी समस्याएं थीं, जिससे दिक्कत और बढ़ गई। सप्ताह का पहला कार्यदिवस यात्रियों के लिए बेहद थकाऊ रहा। बारिश, सुरक्षा इंतज़ाम और ट्रैफिक जाम ने मिलकर शहरवासियों की रफ़्तार थाम दी। लोग सोशल मीडिया पर नाराजग़ी जताते दिखे और यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या हर बार वीवीआईपी मूवमेंट का खामियाज़ा आम नागरिकों को ही भुगतना होगा?