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मेडिकल पढ़ाई को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा सवाल, क्या एसएसकेएम सबसे ऊपर है?
कोलकाता। सपनों और हौसले के सामने शारीरिक सीमाएँ भी झुक जाती हैं। मालदा के रहने वाले प्रशांत मंडल इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। पोलियो के कारण हाथ पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए, मात्र साढ़े तीन उंगलियों के सहारे उन्होंने हायर सेकेंडरी और नीट परीक्षा पास कर ली। नीट में उनका ऑल इंडिया रैंक 161404 और पीडब्लूबीडी श्रेणी में 3627 आया लेकिन मेडिकल पढ़ाई का सपना तभी अधूरा रह जाता, जब एसएसकेएम अस्पताल ने उन्हें अनुपयुक्त ठहरा दिया।
एसएसकेएम अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने रिपोर्ट दी थी कि अधूरे हाथ और मात्र साढ़े तीन उंगलियों के सहारे प्रशांत मेडिकल की पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। सर्जरी के औजार पकडऩा कैसे संभव होगा? यह सवाल उठाकर अस्पताल ने उन्हें फिटनेस सर्टिफिकेट देने से इंकार कर दिया। इससे प्रशांत का सपना टूटता नजर आया। इसके बाद प्रशांत ने कोलकाता हाईकोर्ट में अपील दायर की।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विश्वजीत बसु ने दूसरी बार मेडिकल जांच कराने का आदेश दिया। कोर्ट ने मुंबई एम्स को मेडिकल फिटनेस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। बुधवार को मुंबई एम्स ने हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसमें साफ कहा गया कि प्रशांत की शारीरिक स्थिति मेडिकल पढ़ाई में बाधा नहीं बनेगी।
रिपोर्ट के आधार पर जस्टिस बसु ने आदेश दिया कि प्रशांत को पीडब्लूबीडी श्रेणी के तहत मेडिकल कॉलेज में प्रवेश सत्यापन का अवसर दिया जाए। जस्टिस बसु ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले भी एसएसकेएम ने एक उम्मीदवार को अस्वीकार किया था, लेकिन दिल्ली एम्स ने उसे उपयुक्त ठहराया। अब प्रशांत के मामले में एसएसकेएम ने मना किया और मुंबई एम्स ने पास कर दिया। आखिर यह मतभेद क्यों? क्या एसएसकेएम अस्पताल सबसे ऊपर है? हाईकोर्ट ने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में पुरुलिया के चंदन माझी को भी एसएसकेएम ने अनुपयुक्त बताया था। चंदन बचपन की दुर्घटना के बाद से व्हीलचेयर पर हैं लेकिन दिल्ली एम्स ने उन्हें मेडिकल पढ़ाई के लिए योग्य ठहराया।