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मोहम्मद अली पार्क का रिजर्वर माक्र्स स्क्वायर पार्क में स्थानांतरित होगा
कोलकाता। कोलकाता नगर निगम ने एक बड़ा फैसला लेते हुए मोहम्मद अली पार्क स्थित पुराने जलाधार को स्थानांतरित करने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। यह जलाधार अब कॉलेज स्ट्रीट स्थित मार्क्स स्क्वायर पार्क में बनाया जाएगा। नगर निगम के मासिक अधिवेशन में इस विषय पर चर्चा के दौरान मेयर फिरहाद हकीम ने खुद यह जानकारी दी और स्पष्ट किया कि पूजा सीजन समाप्त होते ही वे स्थल का दौरा करेंगे और निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।मोहम्मद अली पार्क का यह जलाधार ब्रिटिश काल में निर्मित हुआ था और यह पार्क के लगभग 75त्न हिस्से पर कब्जा किए हुए है। वर्ष 2019 में इसमें गंभीर दरारें देखी गई थीं, जिसके बाद पार्क का एक हिस्सा धंस गया था। जलाशय की गहराई करीब 20 फीट है और इसमें करीब 4.5 मिलियन गैलन पानी संग्रहित करने की क्षमता है।
उस दौरान जादवपुर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की टीम और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने जलाधार का गहन निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पाया गया कि जलाधार की स्थिति जर्जर हो चुकी है और तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है।मेयर हकीम ने स्पष्ट किया कि मोहम्मद अली पार्क के जलाधार को बंद किए बिना मरम्मत संभव नहीं है, लेकिन यह भी उतना ही असंभव है क्योंकि यह जलाधार कोलकाता के कई प्रमुख इलाकों में जल आपूर्ति सुनिश्चित करता है। करीब 5 लाख लोग इस जल स्रोत पर निर्भर हैं। ऐसे में, मार्क्स स्क्वायर में समान क्षमता वाला एक वैकल्पिक जलाधार बनाने का निर्णय लिया गया है। यह जलाधार चालू होने के बाद ही पुराने जलाधार की मरम्मत की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि लोगों को पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े।
मेयर फिरहाद हकीम ने जलाधार स्थानांतरण को लेकर उठ रही आपत्तियों पर सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं के निजी स्वार्थ की वजह से इलाके का विकास नहीं रुक सकता। मोहम्मद अली पार्क में यह राजनीतिक अहंकार की लड़ाई है, पर विकास कार्य में बाधा नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ स्थानीय लोग और राजनेता मार्क्स स्क्वायर में निर्माण को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। मैं स्वयं इस मामले को लेकर चिंतित हूं। पूजा खत्म होते ही मौके पर जाऊंगा और सभी मुद्दों का समाधान करूंगा।मार्क्स स्क्वायर में प्रस्तावित जलाधार निर्माण को लेकर भी कुछ प्रारंभिक अड़चनें हैं। यह इलाका केवल एक सामान्य पार्क नहीं है, बल्कि यहाँ बच्चों के लिए खेल का मैदान और बड़ों के लिए ओपन ग्राउंड मौजूद है। ऐसे में जलाधार कहाँ बनेगा, कितना क्षेत्र घेरेंगे, और पार्क के उपयोग पर क्या असर पड़ेगा इन सभी बातों पर स्थानीय निवासियों और निगम अधिकारियों के बीच मतभेद उभरे हैं। इसीलिए, मेयर और मेयर परिषद के सदस्य पहले ही स्थल का दौरा कर चुके हैं। वहाँ उन्होंने विस्तार से चर्चा की कि निर्माण किस हिस्से में होगा ताकि बच्चों और आम लोगों को अधिक से अधिक राहत मिल सके।नगर निगम के पार्षद विश्वरूप दे ने अधिवेशन में प्रस्ताव रखा था कि क्षेत्र में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है और जलाधार के स्थानांतरण या पुनर्निर्माण से इसका समाधान संभव है। इस प्रस्ताव का मेयर ने समर्थन किया और शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया
टाली नाला को गंगा से जोड़ा जाएगा परियोजना पर खर्च होंगे 917 करोड़
निगम ने शहर के जल निकासी और नाले की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा की है। इस प्रोजेक्ट के तहत टाली नाला की सफाई और पुनर्विकास पर करीब 800 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि बराज और लॉक गेट के निर्माण पर अतिरिक्त 117 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह जानकारी कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने दी।मेयर हकीम ने बताया कि निगम का उद्देश्य टाली नाला को गंगा नदी से जोडऩा है। ऐसा इसलिए ताकि जब गंगा में हाई टाइड यानी ज्वार आए, तब उसका स्वच्छ जल टाली नाला में प्रवेश कर सके। इस प्रक्रिया से नाले का स्थायी काला और बदबूदार पानी साफ होगा और उसका प्राकृतिक प्रवाह बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि गंगा का ज्वारीय पानी यदि टाली नाला में प्रवेश करे, तो उसकी सफाई स्वाभाविक रूप से होती रहेगी। इससे नाले का कालापन भी खत्म होगा और दुर्गंध की समस्या से भी राहत मिलेगी।इस परियोजना में एक आधुनिक बराज और एक लॉक गेट भी बनाया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत 117 करोड़ रुपये है। इन संरचनाओं की मदद से पानी के प्रवाह को नियंत्रित किया जाएगा और गंगा का जल उचित समय पर टाली नाला में डाला जा सकेगा।प्रस्तावित प्रोजेक्ट से कालीघाट और उसके आसपास के इलाकों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। यह क्षेत्र निचला होने के कारण बारिश के समय जल जमाव और नालों के ओवरफ्लो की समस्या से ग्रस्त रहता है।गौरतलब है कि कालीघाट में ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का निवास भी स्थित है। इस क्षेत्र में जब नालों में पानी का दबाव बढ़ता है, तब कई बार गंदा पानी गलियों और घरों तक चढ़ जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी असुविधा होती है। मेयर ने कहा कि इस परियोजना से इस पूरी समस्या का समाधान हो सकेगा।
गंदा पानी अब सड़कों पर नहीं फैलेगा और नालों में जल स्तर नियंत्रण में रहेगा।
यह परियोजना कोलकाता नगर निगम की एक दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शहर की जल निकासी प्रणाली को आधुनिक बनाना है। टाली नाला, जो लंबे समय से अविकसित और प्रदूषित स्थिति में रहा है, अब तकनीकी समाधान के ज़रिए एक स्वच्छ और व्यवस्थित जल मार्ग में बदला जाएगा।