वैभव सूर्यवंशी का लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक, महज 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए
रेड रोड स्थित आंबेडकर मूर्ति से लेकर ठाकुरबाड़ी तक निकली ममता की यह रैली ऐतिहासिक रही।
कोलकाता। एसआईआर के खिलाफ कोलकाता के जोड़ासांको में मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जबरदस्त जनसभा को संबोधित किया। रेड रोड स्थित आंबेडकर मूर्ति से लेकर ठाकुरबाड़ी तक निकली ममता की यह रैली ऐतिहासिक रही।
हजारों लोगों की भीड़ के बीच मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और बीजेपी को कड़े शब्दों में चेतावनी दी।अगर एक भी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से काटा गया, तो मैं बीजेपी की सरकार तोड़ दूंगी। ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर केवल एक क़ानून नहीं, बल्कि यह लोगों के अस्तित्व और नागरिक अधिकारों पर हमला है।
उन्होंने कहा कि पहले नोटबंदी हुई थी, अब जनबंदी हो रही है। यह कानून लोगों को डराने और विभाजित करने का नया तरीका है।उन्होंने सवाल उठाया कि तीन महीने बाद जब चुनाव होने वाले हैं, तब इस समय एसआईआर लागू करने की क्या जरूरत है।अगर चुनाव के बाद ये प्रक्रिया होती, तो लोग भी इसे स्वीकार करते, लेकिन अभी यह सिर्फ वोट लूटने की रणनीति है।ममता बनर्जी ने कहा कि भाषा के आधार पर नागरिकता तय करना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि बांग्ला बोलने से कोई बांग्लादेशी नहीं हो जाता, जैसे हिंदी या उर्दू बोलने से कोई पाकिस्तानी नहीं होता। यह देश सभी का है बंगालियों, बिहारी, मराठी, पंजाबी, सभी का।उन्होंने याद दिलाया कि 1947 से पहले भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश एक थे, इसलिए किसी को बाहरी कहकर नागरिक अधिकार छीनना संविधान का अपमान है।हम सबको अपने ही देश में फिर से अपनी पहचान साबित करनी पड़ेगी?
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कानून के तहत हर व्यक्ति को फिर से अपने दस्तावेज़ दिखाने होंगे।2002 में अभिषेक बनर्जी भी वोटर लिस्ट में नहीं थे, उन्हें भी बाद में नाम दर्ज कराना पड़ा था। इस कानून के तहत हमें भी अपने नाम दर्ज कराने होंगे। क्या हमें अब अपने ही देश में साबित करना पड़ेगा कि हम भारतीय हैं? ममता बनर्जी ने बीजेपी के नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि बीजेपी के जननेता सौ-सौ गाडय़िों के काफिले लेकर घूमते हैं। जनता भूखी है, किसान परेशान है, लेकिन ये लोग पैसे और दिखावे की राजनीति में लगे हैं। बीजेपी वोट से नहीं, नोट से चुनाव जीतती है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी के लोग सत्ता में बने रहने के लिए हर हथकंडा अपनाते हैं।बीजेपी ने नोटबंदी की, अब जनबंदी की। अगला कदम शायद लोकतंत्रबंदी होगा।जो हमसे कागज़ मांगते हैं, पहले अपने बाप-दादा के दिखाएँ।ममता ने कहा कि केंद्र सरकार एसआईआर के नाम पर नागरिकों को धमका रही है। जो हमसे कागज मांग रहे हैं, पहले अपने बाप-दादा के कागज दिखाएँ। हमें किसी को साबित करने की जरूरत नहीं कि हम इस मिट्टी के हैं। यह देश संविधान से चलता है, किसी पार्टी के आदेश से नहीं।मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर उनकी छवि खराब करने की साजिश कर रही है। मैं जो बोलती हूं, बीजेपी उसे काटकर एआई से बदल देती है और फेक वीडियो फैलाती है। मुझे बदनाम करने के लिए झूठ और फरेब का सहारा लिया जाता है।
उन्होंने आगे कहा बीजेपी की सरकार करती लूट और बोलती झूठ। यही इनका नारा है। ममता बनर्जी ने बताया कि अलीपुरद्वार के एक गांव में 2002 की वोटर लिस्ट में 700 नाम थे, जिनमें से अब 526 नाम काट दिए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि आधार कार्ड बनवाने के नाम पर लोगों से ?1000 तक लिए जा रहे हैं। अगर वोटर लिस्ट झूठी है, तो केंद्र सरकार भी झूठी है। यह सिर्फ सत्ता के लिए किया जा रहा खेल है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बीजेपी की योजना करीब दो करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की है, ताकि वे चुनावी लाभ उठा सकें। बीजेपी का मकसद साफ है विरोध करने वालों को मिटा दो, गरीबों और अल्पसंख्यकों को बाहर कर दो। लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे। ममता बनर्जी ने खुलासा किया कि तृणमूल कांग्रेस के तीन विधायकों को ईडी अधिकारियों ने कॉल कर केस खत्म करने के लिए पैसे मांगे।यह देश में लोकतंत्र नहीं, डर और भ्रष्टाचार का शासन है। लेकिन हम झुकने वाले नहीं हैं।अपने भाषण में ममता ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि बीजेपी के बाबू रामदेव बाबू का दूध पीते हैं और धर्म की बातें करते हैं। असम में बीजेपी नकली वोटरों के सहारे चुनाव जीतती है।ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री का नाम लिए बिना कहा कि जिसके हाथों में दंगों के छींटे लगे हैं, वह अब देशभक्ति की बात करता है। वह मीरजाफर है, जिसने जनता के साथ विश्वासघात किया है। उसे बंगाल की एकता से जलन होती है। सभा के अंत में ममता बनर्जी ने जनता से आह्वान किया कि दिल्ली सरकार को केंद्र से हटाओ। तब किसी कार्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर वोटर लिस्ट में किसी का नाम गलत तरीके से काटा गया, तो बंगाल की जनता सडक़ों पर उतर आएगी। यह लड़ाई बंगाल की आत्मा की लड़ाई है। ममता ने कहा कि वह पद और कुर्सी का सम्मान करती हैं, लेकिन हर चीज की एक सीमा होती है। उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि लोग सच बोलें और अन्याय के खिलाफ खड़े हों।