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मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी
कोलकाता। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सॉल्ट लेक स्टेडियम में अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेस्सी के कार्यक्रम के दौरान हुई गड़बड़ी की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) के काम में इस स्तर पर दखल देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और फिलहाल इसमें किसी प्रकार की अनियमितता के ठोस संकेत सामने नहीं आए हैं।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन भी शामिल हैं, ने कहा कि केवल आरोपों के आधार पर जांच को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो या किसी अन्य एजेंसी को सौंपने का आदेश नहीं दिया जा सकता।
अदालत तीन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें मामले की सीबीआई जांच और दर्शकों को टिकट की राशि लौटाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कार्यक्रम के दौरान मैदान में अव्यवस्थित हालात बने, कुछ लोगों द्वारा मेस्सी के आसपास धक्का-मुक्की की गई और अपने पसंदीदा खिलाड़ी को न देख पाने से नाराज दर्शकों के एक वर्ग ने उपद्रव किया, जिसके चलते कार्यक्रम समय से पहले समाप्त करना पड़ा।
अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और कार्यक्रम आयोजक को चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल कर सकेंगे। मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि टिकटों की बिक्री सरकार ने नहीं की थी और यह कार्यक्रम एक निजी प्रबंधन कंपनी द्वारा आयोजित किया गया था। सरकार ने कहा कि एसआईटी पूरी गंभीरता से जांच कर रही है और कार्यक्रम प्रबंधन कंपनी के मालिक सताद्रु दत्ता को 14 दिसंबर को गिरफ्तार किया जा चुका है।
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की ओर से पेश वकील ने कार्यक्रम के लिए धन के स्रोत पर सवाल उठाते हुए किसी सक्षम केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग की। वहीं राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना पर खेद जताया है और एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसमें उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।