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शांतनु ठाकुर के बयान पर रणक्षेत्र बना मतुआ धाम
कोलकाता। ठाकुरबाड़ी उस समय गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई, जब केंद्रीय जहाज राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर और तृणमूल की राज्यसभा सांसद ममताबाला ठाकुर के समर्थक आपस में भिड़ गए। विवाद की जड़ शांतनु ठाकुर का वह बयान है, जिसमें उन्होंने घुसपैठियों को रोकने के लिए एक लाख मतुआ समुदाय के लोगों के मताधिकार खोने की बात कही थी। इस बयान के विरोध में निकले मार्च के दौरान दोनों गुटों में जमकर मारपीट हुई, जिसमें कई लोगों के घायल होने की सूचना है। सोमवार को बनगाँव के गाड़ापोता में एक रैली को संबोधित करते हुए शांतनु ठाकुर ने कहा था, 50 लाख रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी मुसलमानों को (वोटर लिस्ट से) बाहर करने के लिए अगर मेरे समुदाय के एक लाख लोगों को मतदान से वंचित रहना पड़ता है, तो हमें इसे स्वीकार करना चाहिए। शांतनु के इसी बयान ने मतुआ समुदाय के भीतर आक्रोश की चिंगारी सुलगा दी। बुधवार को ममताबाला ठाकुर के अनुयायी इस बयान पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए शांतनु ठाकुर के आवास की ओर बढ़े।
आरोप है कि जैसे ही प्रदर्शनकारी वहां पहुंचे, दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि समर्थकों ने एक-दूसरे पर लात-घूंसे और थप्पड़ बरसाने शुरू कर दिए। एक प्रदर्शनकारी को जमीन पर गिराकर बेरहमी से पीटा गया, जिसे काफी चोटें आई हैं। ममताबाला ठाकुर ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि शांतनु हमेशा से यही करते आए हैं। मतुआ समाज उनसे जवाब मांगने गया था। उन्होंने लोगों से फॉर्म भरवाए, अब अगर उनका नाम कटता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी? आज उन्होंने मतुआ समुदाय के लोगों पर हाथ उठाया है, जिसका जवाब उन्हें भविष्य में मिलेगा।
शांतनु के समर्थकों का कहना है कि ममताबाला के संघ के महासचिव सुकेश चौधरी कुछ उपद्रवियों के साथ मंत्री पर हमला करने आए थे, जिन्हें वहां से खदेड़ दिया गया। केंद्रीय मंत्री की पत्नी सोमा ठाकुर ने आरोप लगाया कि कुछ हरमाद (उपद्रवी) हथियारों के साथ घर के सामने इक_ा हुए थे और उन्होंने ही हमला शुरू किया। ठाकुरबाड़ी में बढ़ते तनाव को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। शांतनु ठाकुर का कहना है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है, जबकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मतुआ समुदाय के अधिकारों के साथ समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।