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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर बंगाल की राजनीति को धार देते हुए तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अलीपुरद्वार में चाय बागान श्रमिकों के साथ बैठक के दौरान कई बड़े ऐलान और तीखे राजनीतिक संदेश दिए।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर बंगाल की राजनीति को धार देते हुए तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अलीपुरद्वार में चाय बागान श्रमिकों के साथ बैठक के दौरान कई बड़े ऐलान और तीखे राजनीतिक संदेश दिए। सबसे अहम घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के चौथी बार मुख्यमंत्री बनते ही चाय श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 250 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार, चाय बागान प्रबंधन और श्रमिक संगठनों को लेकर त्रिपक्षीय वार्ता की जाएगी।
नए साल 2026 की शुभकामनाएं देते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वे चुनावी मौसम से इतर भी चाय श्रमिकों के बीच आते रहे हैं और उनकी समस्याओं को नजदीक से समझते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस चुनाव जीतने के बाद वादे भूल जाने वाली पार्टी नहीं है, बल्कि जो कहा जाता है उसे जमीन पर उतारने का प्रयास किया जाता है।
अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों से मनरेगा का पैसा रोका गया है। उन्होंने सवाल किया कि अगर किसी राज्य या जिले में बीजेपी चुनाव हार जाती है, तो क्या वहां के गरीबों और मजदूरों को सजा दी जानी चाहिए? उन्होंने कहा कि 2021 में अलीपुरद्वार की सभी विधानसभा सीटों पर तृणमूल हार गई थी, फिर भी यहां विकास कार्य नहीं रुके।उन्होंने लख्मी भंडार योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि अलीपुरद्वार जिले की पांच विधानसभा सीटों में हर महीने लगभग 25 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में भेजे जा रहे हैं। सालाना यह राशि करीब 300 करोड़ रुपये और पांच वर्षों में 1,500 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर कोई यह साबित कर दे कि तृणमूल के हारने वाले किसी इलाके में महिलाओं को लख्मी भंडार नहीं मिला, तो वे जवाब देने को तैयार हैं।
बीजेपी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए अभिषेक बनर्जी ने याद दिलाया कि 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चाय बागानों को केंद्र सरकार द्वारा संचालित करने का वादा किया था, लेकिन दस वर्षों में सिर्फ एक अधिसूचना आई, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के वादों की कोई विश्वसनीयता नहीं, वह चाय श्रमिकों को स्थायी राहत कैसे दे सकती है।
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी अभिषेक बनर्जी ने तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के नाम पर बुजुर्गों और आम लोगों को परेशान किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले लोग सरकार चुनते थे, लेकिन अब बीजेपी मतदाता चुनने की कोशिश कर रही है। उन्होंने जनता से अपील की कि इस “जुल्म” का जवाब ईवीएम के जरिए कतार में खड़े होकर दिया जाए।अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि केंद्र सरकार बंगाल से जीएसटी और इनकम टैक्स के नाम पर 6.5 लाख करोड़ रुपये ले चुकी है, लेकिन बदले में आवास, जल जीवन मिशन, ग्राम सड़क योजना और शिक्षा से जुड़े फंड रोक दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद ममता बनर्जी की सरकार अपने संसाधनों से विकास कार्य चला रही है। सभा में उन्होंने कहा कि बीजेपी शासित राज्यों में बंगाल के लोगों को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और ऐसे मामलों की संख्या 1,200 से ज्यादा है।
उन्होंने इसे बंगाल विरोधी मानसिकता करार दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ही देश में एकमात्र ऐसी पार्टी है जो लगातार बीजेपी को चुनौती दे रही है और बंगाल में उन्हें हराती आ रही है।अभिषेक बनर्जी ने अलीपुरद्वार को जिला बनाने का श्रेय भी ममता बनर्जी सरकार को देते हुए कहा कि अब 2026 में अलीपुरद्वार की बारी है लोकतंत्र और अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णायक भूमिका निभाने की। उन्होंने लोगों से अपील की कि बीजेपी की “विभाजनकारी राजनीति” को खारिज कर तृणमूल कांग्रेस को मजबूत जनादेश दें।
सभा के अंत में अभिषेक बनर्जी ने चाय श्रमिकों की समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि अपनी क्षमता के भीतर रहकर हर समस्या के समाधान की कोशिश की जाएगी। उनके भाषण को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर बंगाल में तृणमूल के मजबूत चुनावी संदेश के रूप में देखा जा रहा है।