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मेयर फिरहाद हकीम की अध्यक्षता वाली अग्नि सुरक्षा समिति ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है
कोलकाता। शहर के रूफटॉप रेस्टोरेंट में अग्नि सुरक्षा नियमों की भारी अनदेखी का खुलासा हुआ है। कोलकाता नगर निगम (केएमसी), पुलिस और दमकल विभाग की संयुक्त टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में 83 में से 27 रेस्टोरेंट दोषी पाए गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन शर्तों पर इन्हें दोबारा खोलने की अनुमति दी गई थी, उन्हें पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। जांच टीम जब चौरंगी, कैमक स्ट्रीट और गरियाहाट जैसे वीआईपी इलाकों के रेस्टोरेंट में पहुंची, तो वहां का नजारा डराने वाला था। अग्नि सुरक्षा समिति की स्पष्ट शर्त थी कि छत पर कोई स्थायी आवरण नहीं होगा, ताकि आग लगने पर धुआं न फंसे। लेकिन जांच में पाया गया कि कई रेस्टोरेंट ने छत को पूरी तरह ढक दिया है।
छत पर खुली आग का उपयोग और गैस सिलेंडरों का भंडारण मिला, जबकि इस पर पूर्ण प्रतिबंध है। सुरक्षा के बजाय सजावट और मुनाफे को तरजीह दी गई। मेयर फिरहाद हकीम की अध्यक्षता वाली अग्नि सुरक्षा समिति ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है। निगम सूत्रों के अनुसार, नियम तोडऩे वाले सभी 27 रेस्टोरेंट को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। उन्हें खामियां सुधारने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। इसके बाद भी यदि सुधार नहीं हुआ, तो इन रेस्टोरेंट को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा। बता दें कि पिछले वर्ष 29 अप्रैल को बड़ाबाजार के मेछुआ में एक होटल में लगी आग ने 14 लोगों की जान ले ली थी। उस भीषण हादसे के बाद ही शहर के सभी 83 रूफटॉप रेस्टोरेंट बंद किए गए थे। पिछले साल दुर्गापूजा से पहले 15 सितंबर को इन्हें इस हलफनामे के बाद खोलने की अनुमति मिली थी कि ये सभी सुरक्षा मानकों का पालन करेंगे। रेस्टोरेंट मालिकों का तर्क है कि लंबे समय तक बंदी से उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ है और सभी कड़े नियमों का पालन करने से मुनाफा कम हो जाता है।
इस पर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दो-टूक कहा कि व्यापारिक लाभ के लिए जनता की जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता। सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा।