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एसआईआर विवाद पर दिल्ली में फूटा तृणमूल सुप्रीमो का गुस्सा
ज्ञानेश कुमार से बीच बैठक में बायकॉट
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सियासी टकराव सोमवार को दिल्ली पहुंच गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, सांसद कल्याण बनर्जी और पार्टी प्रतिनिधिमंडल के साथ चुनाव आयोग का रुख किया, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ प्रस्तावित बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। निर्वाचन सदन से बाहर निकलते ही मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग और केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। ममता बनर्जी ने कहा कि इतना झूठा, अहंकारी और बीजेपी के इशारे पर चलने वाला चुनाव आयोग मैंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी नहीं देखा। मैं वर्षों से राजनीति कर रही हूं, मंत्री भी रही हूं, लेकिन ऐसा घमंड पहले कभी नहीं देखा। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था नहीं रह गया है, बल्कि वह बीजेपी के अंधे इशारों पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि एसआईआर के नाम पर बंगाल में लोकतंत्र के मूल अधिकारों को कुचला जा रहा है और आम मतदाताओं को आतंकित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत
कम से कम 50 जीवित मतदाताओं को चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में “मृत” घोषित कर दिया गया,वहीं 50 ऐसे परिवारों को भी दिल्ली लाया गया, जिनका आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण हुए मानसिक उत्पीड़न और प्रशासनिक दबाव से उनके परिवार के किसी सदस्य की मौत हो गई।इन कथित पीड़ितों को तृणमूल प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के सामने पेश किया, ताकि आयोग स्वयं जमीनी हकीकत देख सके। ममता बनर्जी ने सबसे बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि “एसआईआर के नाम पर पश्चिम बंगाल में 58 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं।”
उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने के बावजूद चुनाव आयोग ने न तो कोई सवाल उठाया और न ही राज्य प्रशासन से कोई जवाब मांगा।
मुख्यमंत्री का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के जरिए की गई और इसके पीछे सीमा खन्ना नाम की एक व्यक्ति की अहम भूमिका है। ममता बनर्जी ने तीखे शब्दों में पूछा “सीमा खन्ना कौन हैं? वह चुनाव आयोग की अधिकारी नहीं हैं। वह बीजेपी की आईटी सेल से जुड़ी हैं। फिर वह चुनाव आयोग की बैठक में कैसे मौजूद हो सकती हैं?”मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ प्रस्तावित बैठक से पहले ही तृणमूल प्रतिनिधिमंडल का जानबूझकर अपमान और अनादर किया गया। इसी वजह से तृणमूल ने बैठक का बहिष्कार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक में ऐसे व्यक्ति को बुलाया गया जो चुनाव आयोग का अधिकारी नहीं है, जिससे बैठक की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के अपने कैमरा पर्सन बैठक के अंदर मौजूद थे लेकिन बाहरी मीडिया को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस पर नाराज़गी जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आप जो चाहें, वही करेंगे ऐसा नहीं हो सकता। यह लोकतंत्र है। मैंने इतने साल राजनीति की है, लेकिन ऐसा अहंकारी चुनाव आयोग कभी नहीं देखा। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री ने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का भी आरोप लगाया। पीड़ित मतदाताओं का परिचय कराते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि जो लोग हिंदू-मुसलमान करते हैं, वे ध्यान से देखें। यहां दो मुसलमान हैं, बाकी हिंदू हैं। फिर भी वोटर लिस्ट से नाम काटे गए।