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फिलहाल एनआईए की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा इलाके में पिछले महीने दो दिनों तक चली हिंसा और तनाव की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मामले में ‘साइबर-इंस्टिगेशन’ यानी सोशल मीडिया के जरिए उकसावे के एंगल पर ध्यान केंद्रित किया है। यह हिंसा झारखंड में एक प्रवासी श्रमिक की मौत के बाद भड़की थी, जिसे कथित तौर पर आत्महत्या का मामला होने के बावजूद हत्या के रूप में पेश किया गया।
एनआईए अधिकारियों ने हिंसा से ठीक पहले सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए संदेशों और पोस्ट की जानकारी जुटाने के लिए बहरमपुर स्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन का दौरा किया है। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी ने विभिन्न सोशल मीडिया अकाउंट्स के डिजिटल फुटप्रिंट भी एकत्र किए हैं और उनकी गहन जांच की जा रही है।
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि झारखंड में प्रवासी श्रमिक की मौत को लेकर सोशल मीडिया पर कई विवादित पोस्ट किए गए थे। झारखंड पुलिस ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए इस मामले को आत्महत्या बताया था। इसके बावजूद, इन पोस्टों के जरिए कथित तौर पर इस घटना को हत्या के रूप में प्रचारित किया गया, जिससे लोगों को गुमराह किया गया और एक विशेष वर्ग में आक्रोश भड़क गया।
एनआईए का मानना है कि इन भ्रामक और उत्तेजक पोस्टों ने स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाई। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन पोस्टों के पीछे स्रोत कौन था और क्या किसी संगठित गिरोह या निहित स्वार्थ से जुड़े तत्वों ने पश्चिम बंगाल में हिंसा फैलाने की साजिश रची थी।
जांच एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि क्या स्थानीय लोगों की भावनाओं को जानबूझकर ऐसे सोशल मीडिया संदेशों के जरिए भड़काया गया था।
गौरतलब है कि 16 जनवरी को झारखंड में प्रवासी श्रमिक की मौत के बाद मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए थे। बड़ी संख्या में लोगों ने रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्ग-12 को कई घंटों तक जाम कर दिया था। इस दौरान पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों पर भी हमले की घटनाएं सामने आई थीं। अगले दिन भी प्रदर्शन जारी रहे, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।
इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई थी, जिसमें बेलडांगा में केंद्रीय बलों की तैनाती और एनआईए जांच की मांग की गई थी। पीआईएल पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने केंद्र सरकार को एनआईए जांच के आदेश देने की स्वतंत्रता दी थी। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने औपचारिक रूप से एनआईए को जांच की मंजूरी दी।
फिलहाल एनआईए की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।