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रंगीन सपनों की खूनी हकीकत : बेहाला में दो करोड़ की डकैती का पर्दाफाश
कोलकाता। चकाचौंध भरी नाइट क्लब लाइफ, महंगी गाडिय़ाँ और रातों-रात करोड़पति बनने की अंधी चाहत ने एक होनहार छात्र को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है। सरशुना इलाके में एक अभिजात आवासीय परिसर में हुई दो करोड़ रुपये की डकैती की गुत्थी को लालबाजार के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट ने सुलझा लिया है।
गिरफ्तार आरोपी हर्षवर्धन साउ, जो बीसीए का छात्र है। उसने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध क्राइम थ्रिलर सीरीज देखकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया था। पहले साबुन से चाबी की छाप और ऑनलाइन मंगाई मशीन पुलिस की गहन पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, वे किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं हैं। आरोपी उसी आवासीय परिसर में रहता था और उसकी मित्रता पीडि़त व्यापारी परिवार की एक युवती से थी। आरोपी को पता था कि परिवार के बेडरूम लॉकर में भारी मात्रा में नकदी और आभूषण रखे रहते हैं। शातिर दिमाग हर्षवर्धन ने पहले साबुन के एक टुकड़े पर फ्लैट की चाबी की छाप ली और उससे नकली चाबी तैयार करवाई। वारदात को अंजाम देने के लिए उसने ऑनलाइन शॉपिंग साइट से एक इलेक्ट्रिक कटर और नकदी गिनने के लिए एक नोट काउंटिंग मशीन भी मंगवाई थी।
वारदात के दिन जब फ्लैट खाली था, हर्षवर्धन नकली चाबी से भीतर दाखिल हुआ। उसने बड़ी सफाई से अलमारी के पीछे से लॉकर का हिस्सा काटकर करीब 1 किलो 200 ग्राम सोने के गहने और 26.5 लाख रुपये नकद निकाल लिए। पुलिस को चकमा देने के लिए उसने लूटी गई रकम को अपनी एक महिला मित्र की सहेली के फ्लैट में छिपा दिया था। हालांकि, लालबाजार के अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल टावर लोकेशन के तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपी को धर-दबोचा। मंगलवार शाम पुलिस ने छापेमारी कर शत-प्रतिशत गहने और नकदी बरामद कर ली है। जांच में आरोपी के दागदार अतीत का भी खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि 11वीं कक्षा में नकल करते पकड़े जाने के बाद उसे शहर के एक नामी निजी स्कूल से निकाल दिया गया था। किसी तरह कॉलेज में दाखिला तो मिला, लेकिन पढ़ाई के बजाय उसका मन नाइटक्लबों और ऐशो-आराम की जिंदगी में अधिक लगता था। वह बिना मेहनत किए बड़ा आदमी बनने का जुनून सवार कर चुका था। पुलिस फिलहाल आरोपी को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस बड़ी साजिश में उसके साथ कोई और भी शामिल था। इस घटना ने एक बार फिर युवाओं के बीच बढ़ते साइबर अपराध और ओटीटी के नकारात्मक प्रभाव पर बहस छेड़ दी है।