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अब स्थिति यह है कि सत्ता पक्ष की इस चाल की काट के लिए विपक्ष भी लोकलुभावन घोषणाओं की कतार में खड़ा हो गया है
कोलकाता। बंगाल की राजनीति में महिलाओं के लिए शुरू की गई 'लक्ष्मी भंडार' योजना अब केवल एक सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार बन गई है। गुरुवार को पेश अंतरिम बजट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जैसे ही भत्ते की राशि में 500 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी का ऐलान किया, सियासी गलियारों में यह बहस तेज हो गई कि आखिर लक्ष्मी को रिझाने की इस होड़ में कौन कितना आगे जाएगा। अब स्थिति यह है कि सत्ता पक्ष की इस चाल की काट के लिए विपक्ष भी लोकलुभावन घोषणाओं की कतार में खड़ा हो गया है।
बजट के बाद सामने आए आंकड़ों के अनुसार, अब राज्य की सामान्य वर्ग की महिलाओं को फरवरी से 1500 रुपये और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग की महिलाओं को 1700 रुपये मासिक मिलेंगे। ममता सरकार के इस कदम को जहां तृणमूल कांग्रेस अपनी जीत का आधार मान रही है, वहीं विपक्षी खेमे ने भी भत्ता युद्ध में अपनी दावेदारी पेश कर दी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजुमदार और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो इस राशि को सीधे 3000 रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। शुभेंदु अधिकारी ने तो यहां तक कहा कि भाजपा सरकार बनने पर महिलाओं को इससे भी बेहतर और सम्मानजनक योजनाएं मिलेंगी। इस सियासी मुकाबले में नई बनी जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायुन कबीर ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए 3000 रुपये मासिक भत्ते के साथ-साथ आवास योजना में 2 लाख रुपये देने का वादा कर दिया है। लेकिन सबसे चौंकाने वाला दावा आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी की ओर से आया है, जिन्होंने कहा कि वे महिलाओं को 5000 रुपये मासिक सहायता देने के पक्ष में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष की इन भारी-भरकम घोषणाओं से यह साफ है कि लक्ष्मी भंडार योजना की लोकप्रियता को नकारा नहीं जा सकता, इसलिए अब हर पार्टी इसे बंद करने की बात करने के बजाय, अधिक राशि देने का वादा कर वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रही है।