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रात में छत का एस्बेस्टस तोड़कर घुसे चोर, अलमारियां-दराज तोड़कर निकाले महत्वपूर्ण दस्तावेज
कोलकाता। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी भारी राजनीतिक घमासान और कानूनी लड़ाई के बीच महानगर कोलकाता में एक दुस्साहसिक घटना सामने आई है। शहर के राजारहाट थाना क्षेत्र के अंतर्गत चौमाथा स्थित बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) कार्यालय में रविवार की देर रात अज्ञात बदमाशों ने धावा बोल दिया। बदमाशों ने कार्यालय की छत का एस्बेस्टस तोड़कर भीतर प्रवेश किया और वहां रखी अलमारियों व दराजों को बेरहमी से खंगाला। प्रारंभिक जांच में जिस तरह से महत्वपूर्ण दस्तावेजों को तितर-बितर किया गया है, उसने चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा और गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, घटना का खुलासा सोमवार सुबह तब हुआ जब कार्यालय के कर्मचारी काम पर पहुँचे। उन्होंने देखा कि छत का एक हिस्सा टूटा हुआ है और पूरे कमरे में फाइलें और कागजात बिखरे पड़े हैं। बदमाशों ने कार्यालय की स्टील की अलमारियों के ताले तोड़ दिए थे और कई दराजों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया था। हैरानी की बात यह है कि कार्यालय में मौजूद अन्य कीमती सामानों या नकदी के बजाय बदमाशों का पूरा ध्यान फाइलों और चुनावी दस्तावेजों पर केंद्रित रहा। पुलिस अब इस बात की सूक्ष्मता से जांच कर रही है कि कहीं इस घुसपैठ का मकसद महत्वपूर्ण डेटा चोरी करना या मतदाता सूची से जुड़े दस्तावेजों को नष्ट करना तो नहीं था। यह घटना ऐसे संवेदनशील समय पर हुई है जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद एसआईआर मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर रही हैं और पूरी राज्य मशीनरी मतदाता सूची के सत्यापन कार्य में जुटी है। राजरहाट और न्यू टाउन के इस इलाके में पहले ही एसआईआर को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश देखा गया है, ऐसे में बीएलओ कार्यालय को निशाना बनाया जाना किसी बड़ी साजिश की ओर भी इशारा कर रहा है। घटना की सूचना मिलते ही राजरहाट थाने की पुलिस और खुफिया विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर साक्ष्य जुटाए हैं।
फिलहाल, पुलिस कार्यालय के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि बदमाशों के आने और जाने के रास्ते का सुराग मिल सके। साथ ही, चुनाव विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस बात का आकलन कर रहे हैं कि कौन-कौन से महत्वपूर्ण रिकॉर्ड गायब हुए हैं या उनके साथ छेड़छाड़ की गई है। इस घटना ने राजधानी के सुरक्षित माने जाने वाले प्रशासनिक कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है और राजनीतिक गलियारों में इसे चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।