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हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची राज्य सरकार
कोलकाता। महानगर की महत्वाकांक्षी न्यू गडिय़ा-एयरपोर्ट (ऑरेंज लाइन) मेट्रो परियोजना एक बार फिर कानूनी पेच में फंस गई है। चिंगड़ीघाटा मोड़ पर मेट्रो विस्तार के लिए ट्रैफिक ब्लॉक करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार और कोलकाता पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य सरकार के इस कदम से करीब 316 वर्गमीटर क्षेत्र में लंबित निर्माण कार्य में और देरी होने की आशंका प्रबल हो गई है, जिससे इस रूट पर मेट्रो सेवा शुरू होने का इंतजार लंबा हो सकता है। दरअसल, कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में निर्देश दिया था कि 15 फरवरी तक ईएम बाइपास पर यातायात को नियंत्रित कर मेट्रो प्राधिकरण को काम शुरू करने की अनुमति दी जाए। विवाद की जड़ चिंगड़ीघाटा मोड़ पर दो महत्वपूर्ण पिलर का निर्माण है। मेट्रो प्राधिकरण का दावा है कि इन दो पिलर के खड़े न होने के कारण साल्टलेक सेक्टर फाइव के रास्ते एयरपोर्ट तक जाने वाली इस महत्वपूर्ण लाइन का काम अधर में लटका है। यह हिस्सा पूरा होते ही ऑरेंज लाइन का ग्रीन लाइन (हावड़ा मैदान-सेक्टर फाइव) के साथ प्रभावी जुड़ाव हो जाएगा, जिससे लाखों यात्रियों को सुगम यातायात की सुविधा मिलेगी। उल्लेखनीय है कि पिलर निर्माण के लिए ट्रैफिक ब्लॉक को लेकर राज्य सरकार और मेट्रो के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही है। पिछले वर्ष इस मामले में हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कोलकाता ट्रैफिक पुलिस सहयोग नहीं कर रही है। मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच के हस्तक्षेप के बाद कई दौर की बैठकें हुईं, लेकिन अंतत: सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए 15 फरवरी की समयसीमा तय की थी। अब राज्य सरकार के साथ-साथ कोलकाता पुलिस आयुक्त और ट्रैफिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। सोमवार को दाखिल इस याचिका में दस्तावेजों की कुछ त्रुटियों के कारण मंगलवार को सुधार का समय दिया गया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट में इस पर सुनवाई पूरी नहीं होती, तब तक चिंगड़ीघाटा में काम शुरू होना मुश्किल है। इस प्रशासनिक और कानूनी खींचतान के बीच आम जनता को बेहतर परिवहन सेवा के लिए अभी और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।