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तीन महीने में फिर बदलेगी थानों की सीमा
कोलकाता। महानगर की तेजी से बदलती भौगोलिक स्थिति और बढ़ती आबादी के बीच पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। शहर में महज तीन महीने के भीतर एक बार फिर तीन प्रमुख थानों की सीमाओं के पुनर्विन्यास (डीलिमिटेशन) का निर्णय लिया गया है। नए आवासीय संकुलों और व्यावसायिक परियोजनाओं के विस्तार से उपजे प्रशासनिक दबाव को कम करने के लिए यह कवायद शुरू की गई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, महानगर के कुछ इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में बहुमंजिला इमारतों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इसके चलते संबंधित थानों पर मुकदमों और शिकायतों का बोझ इस कदर बढ़ गया था कि जांच प्रक्रिया और गश्त जैसी बुनियादी पुलिसिंग प्रभावित होने लगी थी। स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करने के बाद विभाग ने पाया कि कुछ थानों के पास कार्यभार अत्यधिक है, जबकि उनके पड़ोसी थानों के पास तुलनात्मक रूप से कम क्षेत्र और मामले हैं। इस असंतुलन को दूर करने के लिए ही सीमाओं के पुनर्निर्धारण का फैसला लिया गया है। सीमाओं के इस फेरबदल का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम को कम करना है। नए परिसीमन के बाद प्रत्येक थाने के अंतर्गत आने वाले इलाकों का आकार संतुलित हो जाएगा, जिससे गश्त व्यवस्था और बीट प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
अधिकारियों का मानना है कि जांच अधिकारियों पर मामलों का बोझ कम होने से लंबित कांडों के निपटारे में तेजी आएगी और स्थानीय स्तर पर शांति व्यवस्था बनाए रखना आसान होगा। पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, इन तीनों थानों की नई सीमाओं को राजपत्र (गजट) अधिसूचना के माध्यम से आधिकारिक रूप से लागू किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत कुछ वार्डों और मोहल्लों को एक थाने से हटाकर दूसरे में जोड़ा जाएगा। प्रशासनिक संक्रमण के इस दौर में रिकॉर्ड्स और लंबित मामलों के स्थानांतरण के साथ-साथ संबंधित थानों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती पर भी विचार किया जा रहा है। आम नागरिकों की सुविधा के लिए विशेष हेल्पडेस्क और सूचना केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे ताकि उन्हें अपने नए अधिकार क्षेत्र की जानकारी मिल सके। उल्लेखनीय है कि महज तीन महीने पहले भी शहर के कुछ हिस्सों में थानों की सीमाओं में आंशिक बदलाव किए गए थे। हालांकि, नई परियोजनाओं और जनसंख्या घनत्व में लगातार हो रहे बदलाव के कारण पुलिस प्रशासन को दोबारा यह कदम उठाना पड़ा है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे नई व्यवस्था को समझने में सहयोग करें और किसी भी प्रकार के भ्रम की स्थिति में पुलिस हेल्पलाइन या अपने स्थानीय थाने से संपर्क करें। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस भौगोलिक पुनर्गठन से जमीनी स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली में कितना सुधार आता है।
लालबाज़ार में साइबर अपराध रोकने के लिए सात नई शाखाएं शुरू, नबान्न ने दी हरी झंडी
महानगर में संगठित साइबर ठगी, फर्जी सिम कार्ड की तस्करी और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाली धन की हेराफेरी पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। नबान्न से औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद कोलकाता पुलिस मुख्यालय, लालबाज़ार ने साइबर अपराध से निपटने के लिए सात विशेष शाखाएं शुरू करने का निर्णय लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन शाखाओं का ढांचा पहले ही तैयार कर लिया गया था, लेकिन प्रशासनिक स्वीकृति के अभाव में इनका संचालन शुरू नहीं हो सका था। अब हरी झंडी मिलने के बाद इन इकाइयों को पूरी तरह सक्रिय किया जा रहा है, जिससे साइबर अपराधियों पर चौतरफा वार किया जा सके। इस नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए सात विशेष अनुभाग बनाए गए हैं। इनमें मुख्य रूप से साइबर पुलिस स्टेशन के साथ-साथ ऑर्गेनाइज्ड साइबर क्राइम सेक्शन, साइबर सिक्योरिटी एंड साइबर सेफ्टी सेक्शन, साइबर फ्रॉड रिकवरी सेल, साइबर फॉरेंसिक लैबोरेटरी, साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन एंड सपोर्ट सेक्शन और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल शामिल हैं। इन शाखाओं में अनुभवी इंस्पेक्टरों और सब-इंस्पेक्टरों की तैनाती की गई है, जो तकनीक के माध्यम से अपराधियों तक पहुँचने का काम करेंगे। विशेष रूप से संगठित साइबर अपराध शाखा का मुख्य ध्यान उन गिरोहों पर होगा जो फर्जी कॉल सेंटर और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों से लोगों को ठग रहे हैं। इसके अलावा, साइबर फ्रॉड रिकवरी सेल का प्राथमिक उद्देश्य ठगी के तुरंत बाद 'गोल्डन आवर' यानी शुरुआती कुछ घंटों के भीतर कार्रवाई कर पीडि़त का पैसा वापस दिलाना होगा। पुलिस का मानना है कि त्वरित कार्रवाई से ठगी गई रकम को फ्रीज करने की संभावना काफी बढ़ जाती है। वहीं, साइबर फॉरेंसिक लैब डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच करेगी, जिससे अदालत में अपराधियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश किए जा सकें। चूंकि कई साइबर गिरोह अब कंबोडिया, म्यांमार और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों से संचालित हो रहे हैं, इसलिए को-ऑर्डिनेशन एंड सपोर्ट सेक्शन विभिन्न राज्यों की पुलिस और जरूरत पडऩे पर इंटरपोल जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। साथ ही, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल के जरिए भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। तकनीक के साथ-साथ जागरूकता पर भी जोर दिया जा रहा है, जिसके तहत साइबर सेफ्टी सेक्शन स्कूल-कॉलेजों में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन विशेषीकृत इकाइयों के सक्रिय होने से संगठित ठगी पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और आम नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति अधिक भरोसा मिल सकेगा।