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प्रशंसकों की उम्मीदें और करोड़ों रुपये अधर में
कोलकाता। विश्वविजेता फुटबॉलर लियोनेल मेसी को करीब से देखने की हसरत पाले सॉल्टलेक स्थित युवाभारती क्रीड़ांगन पहुंचे हजारों प्रशंसकों के लिए वह रात एक बुरा सपना बनकर रह गई। घटना के दो महीने बीत जाने के बाद भी न तो अव्यवस्थाओं के जख्म भरे हैं और न ही टिकटों के रिफंड का कोई रास्ता साफ हुआ है।
वादे, बयानबाजी और जांच समितियों के गठन के बीच अब दर्शकों का धैर्य जवाब दे रहा है। करोड़ों रुपये की टिकट राशि अभी भी कानूनी दांव-पेंच और अदालती कार्यवाही के फेर में अटकी हुई है।
अधिकारियों के वादे हुए हवा, आयोजक को मिली राहत
घटना के तत्काल बाद राज्य पुलिस के तत्कालीन डीजी राजीव कुमार ने सार्वजनिक रूप से दर्शकों का पैसा लौटाने की बात कही थी। उन्होंने कड़े तेवर दिखाते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी, लेकिन उनके सेवानिवृत्त होते ही मामला ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। दूसरी ओर, इस मेगा इवेंट के आयोजक शताद्रू दत्ता, जिन्हें हंगामे वाले दिन ही गिरफ्तार किया गया था, अब अंतरिम जमानत पर बाहर हैं। पीडि़त दर्शकों का आरोप है कि जमानत मिलने के बाद से आयोजक से संपर्क साधना असंभव हो गया है।
कानूनी दलीलों में उलझा रिफंड का गणित
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा पेंच आयोजक की दलीलों ने फंसाया है। शताद्रू दत्ता की ओर से तर्क दिया गया है कि टिकटों पर नो रिफंड की शर्त स्पष्ट थी। उनका कहना है कि चूंकि मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए अभी पैसा लौटाना अपराध स्वीकार करने जैसा होगा। हालांकि, जांच में यह तथ्य सामने आया है कि 34,576 टिकटों की बिक्री से 20 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई गई थी। पुलिस ने आयोजक के जिस बैंक खाते को फ्रीज किया है, उसमें करीब 22 करोड़ जमा हैं। एसआईटी ने अदालत से इसी राशि से रिफंड करने की अपील की है, लेकिन बिना चार्जशीट और अंतिम आदेश के प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
मुख्यमंत्री की नाराजगी के बावजूद अनिश्चितता
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद इस घटना पर गहरी संवेदना और नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने मेसी और प्रशंसकों से माफी मांगते हुए सेवानिवृत्त न्यायाधीश असीम कुमार राय की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सकारात्मक संकेत तो दिए, लेकिन मामला न्यायालय में होने के कारण फिलहाल हाथ खड़े कर दिए हैं। 13 दिसंबर की उस रात मंत्रियों और वीआईपी के जमावड़े के कारण मची भगदड़ ने सुरक्षा एजेंसियों को मेसी और उनके साथियों को मैदान से बाहर निकालने पर मजबूर कर दिया था, जिसके बाद भड़के आक्रोश ने स्टेडियम में जमकर तोडफ़ोड़ की थी।
प्रशंसकों की टूटती उम्मीद और अधूरे सवाल
हावड़ा की अनिंदिता बेरा जैसे हजारों लोग हैं जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई के 13 से 16 हजार रुपये तक एक टिकट पर खर्च किए थे। अनिंदिता का कहना है कि उन्होंने अब भी टिकट संभाल कर रखा है, पर अब रिफंड की उम्मीदें धुंधली पड़ती जा रही हैं। दो महीने बाद स्थिति यह है कि मेसी अपने देश लौट चुके हैं, जांच अधिकारी बदल चुके हैं और आयोजक जमानत पर हैं। सवाल अभी भी वही है कि क्या उन हजारों खेलप्रेमियों को उनका हक वापस मिलेगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।