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अब दिल्ली हाईकोर्ट को यह तय करना है कि रॉटवाइलर हेनरी का असली ठिकाना कहां होगा
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और उनके पूर्व मित्र जय अनंत देहद्राई के बीच पालतू कुत्ते हेनरी के मालिकाना हक को लेकर चल रहा विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। रॉटवाइलर नस्ल के इस कुत्ते की कस्टडी पाने के लिए महुआ मोइत्रा ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इससे पहले साकेत कोर्ट ने महुआ की उस मांग को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने हेनरी को महीने में कम से कम 10 दिन अपने पास रखने की अनुमति मांगी थी। अब इस हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई में महुआ ने चार वकीलों की टीम के जरिए अपनी दलीलें पेश की हैं, जिसमें उन्होंने कुत्ते के प्रति अपने भावनात्मक लगाव और पालन-पोषण की जिम्मेदारी का हवाला दिया है। महुआ मोइत्रा का तर्क है कि हेनरी उन्हें उपहार स्वरूप मिला था और उन्होंने ही उसकी पूरी देखभाल की है। याचिका में कहा गया है कि महज आर्थिक भुगतान कर कुत्ता खरीद लेने से कोई व्यक्ति उसका पूर्ण मालिक नहीं बन जाता, बल्कि जीव की देखभाल और उसके प्रति जिम्मेदारी अधिक महत्वपूर्ण होती है। सांसद के वकीलों ने दावा किया है कि निचली अदालत ने कानून के सभी पहलुओं और पशु कल्याण की बारीकियों पर विचार किए बिना ही एकपक्षीय फैसला सुनाया था।
वहीं दूसरी ओर, जय अनंत देहद्राई इस मामले में झुकने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने गुरुवार को स्वयं दिल्ली हाईकोर्ट में उपस्थित होकर महुआ की याचिका का विरोध किया और अपनी दलीलें पेश कीं। उल्लेखनीय है कि जय अनंत देहद्राई और महुआ मोइत्रा के बीच का यह विवाद केवल पालतू जानवर तक सीमित नहीं है। देहद्राई वही व्यक्ति हैं जिन्होंने संसद में कैश फॉर क्वेरी (पैसे लेकर सवाल पूछने) के मामले में महुआ के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद उनकी सांसदी भी चली गई थी। अब हेनरी की कस्टडी का मामला दोनों पक्षों के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर विस्तृत सुनवाई की तारीख तय की है। अब दिल्ली हाईकोर्ट को यह तय करना है कि रॉटवाइलर हेनरी का असली ठिकाना कहां होगा।