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बेहाला पश्चिम में समर्थकों से मिले, चुनाव लडऩे पर गेंद पार्टी के पाले में डाली
कोलकाता। शिक्षक भर्ती घोटाले में लंबी कानूनी लड़ाई और तीन साल से अधिक समय जेल में बिताने के बाद, पूर्व कद्दावर मंत्री पार्थ चटर्जी पहली बार अपने निर्वाचन क्षेत्र बेहाला पश्चिम पहुंचे। गुरुवार को जब पांच बार के विधायक अपने पुराने गढ़ में दाखिल हुए, तो उनके चेहरे पर वही पुरानी राजनीतिक सक्रियता और समर्थकों के प्रति आभार का भाव स्पष्ट नजर आया। नाकतला स्थित अपने आवास से निकलकर वह मैन्टन इलाके में स्थित अपने विधायक कार्यालय पहुंचे, जहाँ उनके पुराने समर्थकों ने उनका स्वागत किया। हालांकि, इस दौरे ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कयासों का बाजार गर्म कर दिया है, लेकिन चटर्जी ने अपनी भावी चुनावी रणनीति का फैसला पूरी तरह से पार्टी नेतृत्व की इच्छा पर छोड़ दिया है। विधायक कार्यालय के बाहर समर्थकों से संवाद के दौरान जब उनसे आगामी विधानसभा चुनाव लडऩे की संभावनाओं पर सवाल किया गया, तो उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में जवाब दिया।
पार्थ चटर्जी ने स्पष्ट किया कि उनके चुनाव लडऩे या न लडऩे का अंतिम निर्णय पार्टी आलाकमान द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी के फैसले के बाद ही वह अपनी व्यक्तिगत राय रखेंगे, लेकिन साथ ही यह भी दोहराया कि वह वैचारिक रूप से आज भी पार्टी के साथ खड़े हैं। गौरतलब है कि साल 2001 में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखने वाले चटर्जी ने इसी क्षेत्र से माकपा के दिग्गज नेता निर्मल मुखोपाध्याय को शिकस्त देकर अपनी पहचान बनाई थी। तब से लेकर 2021 तक वह लगातार पांच बार यहाँ से जीत दर्ज कर चुके हैं।
पार्थ चटर्जी का यह दौरा भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जुलाई 2022 में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तारी के बाद उन्हें न केवल मंत्रिमंडल से हाथ धोना पड़ा था, बल्कि तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें महासचिव पद से हटाते हुए छह साल के लिए निलंबित भी कर दिया था। जेल से जमानत मिलने और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से उबरने के बाद, उन्होंने भाषा दिवस के अवसर को अपने मतदाताओं का आभार जताने के लिए चुना। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि बेहाला पश्चिम की जनता ने उन पर जो भरोसा जताया है, वह उसे कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने क्षेत्र का निरीक्षण करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि वह आज भी जनता के बीच के ही व्यक्ति हैं। हालांकि, इस दौरे के दौरान एक महत्वपूर्ण राजनीतिक शून्यता भी देखी गई।
बेहाला पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तृणमूल कांग्रेस के 10 पार्षदों में से कोई भी पार्थ चटर्जी से मिलने नहीं पहुंचा, जो पार्टी के भीतर उनके मौजूदा समीकरणों की ओर इशारा करता है। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और पार्टी से जारी निलंबन के बीच, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस उन्हें दोबारा टिकट देने में हिचकिचा सकती है। समर्थकों के बीच गाड़ी में बैठकर चाय पीते और क्षेत्र का मुआयना करते पार्थ चटर्जी ने फिलहाल अपनी ओर से स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन अब सबकी नजरें कालीघाट के फैसले पर टिकी हैं कि क्या पार्टी अपने इस पुराने सिपाही को फिर से मौका देगी या बेहाला पश्चिम में किसी नए चेहरे की तलाश की जाएगी।