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हिंदू नामों की आड़ में रची जा रही थी बड़ी साजिश
कोलकाता। कोलकाता में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की गहरी पैठ और एक सुनियोजित साजिश का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी उमर फारूक ने महानगर को ही अपना मुख्य परिचालन केंद्र बना लिया था और वह लश्कर के एक सक्रिय हैंडलर के तौर पर काम कर रहा था। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि उमर का संपर्क मार्च 2025 में कश्मीर निवासी सब्बिर अहमद लोन से हुआ था, जिसके बाद कोलकाता को दहलाने की खतरनाक साजिश की पटकथा लिखी गई। इस नेटवर्क ने सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए न केवल हिंदू नामों का सहारा लिया, बल्कि शहर के अति-संवेदनशील धार्मिक स्थलों की रेकी कर उनके वीडियो सीमा पार अपने आकाओं को भेजे।
खुफिया एजेंसियों के दावे के मुताबिक, हैंडलर सब्बिर के सीधे निर्देश पर उमर ने कोलकाता में एक किराए का मकान लिया था, जिसे साजिश को अंजाम देने के लिए 'सेफ हाउस' के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि आतंकियों के निशाने पर चांदनी चौक इलाके के पास स्थित एक प्रमुख मंदिर था। उमर और उसके साथियों ने अपनी पहचान छिपाकर इस मंदिर की टोह ली और उसका विस्तृत वीडियो बनाकर कश्मीर में बैठे अपने हैंडलर को भेजा। साजिश का दायरा केवल रेकी तक सीमित नहीं था सुरक्षा बलों को पुख्ता इनपुट मिले हैं कि यह मॉड्यूल शहर में विस्फोटक और आधुनिक हथियार जुटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर चुका था। दिसंबर 2024 से ही कोलकाता के विभिन्न हिस्सों में रेकी की जा रही थी और माहौल को अस्थिर करने के लिए देश विरोधी पोस्टर लगाने की भी योजना बनाई गई थी। उमर और उसके गिरोह ने सोची-समझी रणनीति के तहत हिंदू नामों का उपयोग किया ताकि स्थानीय लोगों और पुलिस की रडार से बचा जा सके। खुफिया अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते इस मॉड्यूल का पर्दाफाश नहीं होता, तो कोलकाता किसी बड़ी आतंकी त्रासदी का गवाह बन सकता था। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां उमर से मिली जानकारियों के आधार पर इस नेटवर्क की अन्य कडिय़ों को जोडऩे में जुटी हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि महानगर में उन्हें स्थानीय स्तर पर और किन लोगों से रसद व अन्य सहायता मिल रही थी।