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गोलाबाड़ी थाने पर वामपंथियों का धावा, पुलिस से सीधी भिड़ंत
हावड़ा। पिलखाना इलाके में प्रमोटर सौफिक खान की हत्या के मामले में मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से आक्रोशित वामपंथी संगठनों ने रविवार को गोलाबाड़ी थाने का घेराव किया। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन ने उस वक्त हिंसक रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की घेराबंदी को तोड़कर थाने के भीतर घुसने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हुई, जिससे समूचा इलाका घंटों तक रणक्षेत्र बना रहा। सैकड़ों की संख्या में वामपंथी कार्यकर्ता उत्तर हावड़ा के सालकिया सम्मिलनी पार्क से रैली निकालकर गोलाबाड़ी थाने पहुंचे। पुलिस ने थाने की सुरक्षा के लिए मजबूत बैरिकेडिंग की थी, लेकिन उग्र प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स पर लात मारकर उन्हें गिरा दिया और आगे बढऩे की कोशिश की। स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने भारी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल और रैफ को तैनात कर दिया। पुलिस को प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि हत्याकांड के चार दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी हारुन खान और रफाकत हुसैन उर्फ रोहन अब भी खुलेआम घूम रहे हैं। हालांकि, राज्य सीआईडी को सौंपी गई इस जांच में अब तक चार लोगों की गिरफ्तारी हुई है और कोलकाता के बौबाजार इलाके से हथियार भी बरामद किए गए हैं, लेकिन मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है। वामपंथी नेताओं ने हुंकार भरते हुए कहा कि जब तक हारुन और रोहन सलाखों के पीछे नहीं होंगे, आंदोलन और तेज किया जाएगा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों में से एक का सुराग कोलकाता के बौबाजार क्षेत्र से मिला था, जहाँ से पुलिस ने दो आग्नेयास्त्र और कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस का मानना है कि हत्या की इस साजिश के तार अंतरराज्यीय गिरोहों से भी जुड़े हो सकते हैं। हावड़ा सिटी पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फरार आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है और तकनीकी सर्विलांस की मदद ली जा रही है। प्रमोटर सौफिक खान की हत्या के बाद से पिलखाना इलाके में अब भी सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग दहशत में हैं। रविवार के इस हंगामे के बाद गोलाबाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस की गश्ती बढ़ा दी गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की आपराधिक वारदात और उस पर होता राजनीतिक विरोध प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।