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फीकी पड़ रही है पार्टियां
कोलकाता। मध्यपूर्व के युद्ध की आंच अब कोलकाता के कैटरिंग व्यवसाय तक पहुँच गई है। शहर में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी के कारण खान-पान सेवा प्रदाताओं के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। आपूर्ति बाधित होने और कीमतों में अचानक आए उछाल ने बड़े सामाजिक आयोजनों और शादियों में भोजन की व्यवस्था को अधर में लटका दिया है। आलम यह है कि शहर के अधिकांश कैटरर्स के पास अब मात्र एक से दो दिन का ही स्टॉक बचा है। वर्तमान स्थिति यह है कि बाजार से कमर्शियल सिलेंडर लगभग नदारद हैं, जिसका सीधा लाभ कालाबाजारी करने वाले उठा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कोलकाता में 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1,988.50 रुपये तक पहुँच गई है, लेकिन कैटरर्स का आरोप है कि उन्हें मजबूरी में इससे कहीं अधिक दाम चुकाने पड़ रहे हैं। गैस की कमी के चलते कैटरिंग फर्मों ने अब अपने मेनू में कटौती करना शुरू कर दिया है। जिन व्यंजनों को तैयार करने में अधिक समय और ईंधन लगता है, उन्हें फिलहाल सूची से हटाया जा रहा है। कैटरिंग उद्योग हजारों दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों और रसोइयों को रोजगार देता है। कैटरिंग मालिकों का कहना है कि यदि यह संकट अगले 7 दिनों तक और खिंचता है, तो वे नए ऑर्डर लेना बंद कर देंगे और पुराने अनुबंधों को पूरा करना भी नामुमकिन हो जाएगा। इससे न केवल आयोजकों को परेशानी होगी, बल्कि इस उद्योग से जुड़े वेटर्स, हेल्पर और क्लीनिंग स्टाफ की नौकरी पर भी तलवार लटक जाएगी। संकट से निपटने के लिए कुछ कैटरर्स ने कोयले या लकडिय़ों की भट्टी की ओर रुख करने पर विचार किया है, लेकिन बड़े आयोजनों में आधुनिक किचन सेटअप के साथ यह बदलाव रातों-रात संभव नहीं है। साथ ही, कोयले की बढ़ती मांग ने उसकी कीमतों को भी प्रभावित किया है।